सीओ कुंडा जियाउल हक की हत्या के मामले में आरोपी घनश्याम सरोज की जमानत अर्जी प्रभारी एडीजे रामाश्रय सिंह ने खारिज कर दी। आरोपी की ओर से तर्क दिया गया कि उसे झूठा फंसाया गया है, उसे किसी ने जियाउल हक को मारते नहीं देखा। वहीं कोर्ट ने कहा कि सीबीआई को इस बात के पर्याप्त सुबूत मिले हैं कि वह सीओ कुंडा की हत्या में संलिप्त रहा है। इस मामले के आरोपी शिवराज की जमानत पूर्व में खारिज हो चुकी है लिहाजा उसे भी जमानत नहीं दी जा सकती।
कोर्ट में घनश्याम की ओर से दी गई जमानत अर्जी में कहा गया कि वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं था। घटना 9 बजे रात की है, जहां 250 लोग मौजूद थे। अंधेरे में किसी को पहचाना नहीं जा सकता है और उसे जियाउल हक को मारते किसी ने नहीं देखा है। वहीं उसके पास से कोई बरामदगी भी नहीं हुई है।
वहीं सीबीआई के लोक अभियोजक केपी सिंह ने तर्क दिया कि विवेचना में आया है कि घनश्याम की सक्रिय भूमिका व संलिप्तता सीओ की हत्या में थी। सीओ की हत्या डंडों, लाठी व हथियार से की गई। सीबीआई ने विवेचना के दौरान हत्या में प्रयुक्त लाठी आरोपी की निशानदेही पर बरामद की थी। गवाहों ने भी उसके हत्या में शामिल होने की बात कही है। गौरतलब है कि सीबीआई ने अपनी विवेचना में 2 मार्च 2013 के सीओ हत्याकांड में घनश्याम सरोज समेत 14 केखिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। वहीं पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज की थी उसमें भी वह नामजद था।