किशोरी सुरक्षा योजना जिले में फ्लाप हो गई है। योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग को किशोरियों को मासिक धर्म और इससे जुड़ी बीमारियों से बचने को लेकर जागरूक करना था। शासन ने स्वास्थ्य विभाग को जिले के विद्यालयों के साथ ही घर-घर जाकर किशोरियों को मुफ्त सेनेटरी नैपकिन बांटने के निर्देश दिए थे, लेकिन कागजों पर भी किशोरियों को नैपकिन बांट दिए गए। वहीं विभाग का दावा है कि करीब चालीस स्कूलों में नैपकिन बांटे गए हैं। इस पूरे मामले में महानिदेशक परिवार कल्याण और प्रमुख सचिव स्वास्थ्य कल्याण ने सीएमओ से जवाब तलब किया है।ग्रामीण और शहरी इलाके की ज्यादातर किशोरियों को मासिक धर्म की जानकारी नहीं होती है। न ही वे इसके बारे में अपने परिजनों से कुछ जानने का प्रयास करती हैं। इस कारण किशोरियों में संक्र ामक रोगों की अधिकता पाई जाती है।
जिसे लेकर शासन ने किशोरियों को सेनेटरी नैपकिन बांटने के साथ स्वास्थ्य परीक्षण करने की योजना की शुरूआत की थी। साथ ही योजना के तहत एएनएम सेंटर पर प्रतिमाह ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस मनाया जाए। लेकिन जिले में सिर्फ कागजों पर ही किशोरियों की जांच और नैपकिन बांट दे रहे हैं। शासन से जनवरी में 1 लाख 77 हजार नैपकिन वितरण करने के लिए आए थे। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो सिर्फ 40 विद्यालयों में नैपकिन बांटे गए। पर अधिकारियों ने रिपोर्ट महानिदेशक परिवार कल्याण व प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के पास नहीं भेजी। इस पर महानिदेशक परिवार कल्याण व स्वास्थ्य ने सीएमओ से जवाब तलब किया है।
किशोरियों को ही नैपकिन देने के आदेश हैं। विद्यालयों में भेजवा दिया गया है। प्रधानाचार्य को वितरण करने के लिए कहा गया है। रही बात ग्रामीण क्षेत्र की, तो आशा बहू व एएनएम वितरण कर रही हैं। अगर वितरण नहीं हो रहा है तो जांच करके कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जल्द शासन को भेज दी जाएगी।
- यूके पांडेय, सीएमओ।