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चाइनीज सामानों का विरोध सिर्फ फेसबुक तक

Sun, 16 Oct 2016 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़।
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न्‍यूूज
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फेसबुक पर इन दिनों चाइनीज सामानों के विरोध को लेकर संग्राम छिड़ा हुआ है। लोग अपने-अपने तरह से चाइनीज सामानों के बहिष्कार को लेकर पोस्ट कर रहे हैं, लेकिन ये विरोध सिर्फ फेसबुक तक ही नजर आ रहा है। बाजार में चाइना के सामान धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। अकेले प्रतापगढ़ जनपद में चाइना के आइटम का सालाना कारोबार करीब 70 करोड़ रुपये का है। दिवाली के पहले छोटे व बड़े दुकानदारों ने करोड़ों रुपये के कारोबार की तैयारी भी कर रखी है। सभी को भरोसा है कि कारोबार पर विरोध का बहुत असर नहीं पड़ेगा। दिवाली पर जिले में 5 करोड़ से अधिक के चीनी आइटमों का कारोबार होता है।
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चाइना से आने वाले सामान बेहद सस्ते होते हैं। इसके कारण ये लोगों की पसंद बने हुए हैं। दिवाली के मौके पर लोगों के लिए आतिशबाजी, बिजली की आकर्षक लाइटें एवं झालर से लेकर गणेश-लक्ष्मी समेत अन्य भगवानों की मूर्तियां तक चाइना से बिकने के लिए प्रतापगढ़ के कारोबारियों के गोदाम तक पहुंच चुकी हैं। चीनी उत्पादों की पैठ आम जरूरत के सामानों से लेकर किचन तक है। कई बड़े कारोबारियों के गोदाम भरे हुए हैं। शहर के पंजाबी मार्केट, बेगमवार्ड, फलमंडी गेट, चौक बजाजा, पल्टन बाजार, बाबागंज, कटरामेदनीगंज आदि इलाके में थोक बाजार चाइनीज आइटमों से भरे पड़े हैं। दो चार दिन लोगों का माहौल देखने के बाद बड़े कारोबारी गोदामों में डंप सामानों की बिक्री तेज कर देंगे। छोटे कारोबारी अभी कम सामानों का उठान किए हैं। व्यापारियों को भरोसा है कि चाइनीज उत्पादों पर दिवाली पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।

बेल्हा में लाखों में आतिशबाजी का व्यापार
धमाके के बिना दिवाली फीकी रहती है। सबसे अधिक लोगों को आतिशबाजी का शौक रहता है। बच्चों से लेकर बड़ों तक पटाखा छुड़ाकर अपनी तरह से खुशी का इजहार करते हैं। कटरामेदनीगंज, बेगमवार्ड, कटरागुलाब सिंह समेत अन्य स्थानों पर बनने वाले पटाखे भले ही जोर धमाका करते हैं लेकिन महंगा रेट होने के कारण लोग कन्नी काटते हैं। चाइना ने भी आतिशबाजी में अपना बाजार बना रखा है। पटाखा कारोबारी रईस अहमद की मानें तो अपने यहां के पटाखों के पैकेट की तुलना में चाइना के पटाखों के दाम कम रहते हैं। जिस राकेट, छुरछुरी, माचिस बम का दाम पैकेट के हिसाब से सवा सौ रुपये के करीब होता है। चाइनीज पटाखा मात्र 50 रुपये में ही मिल जाता है। चाइना की आतिशबाजी ने जनपद की आतिशबाजी को 40 फीसदी से अधिक नुकसान पहुंचाया है। भले ही चाइनीज आतिशबाजी पर प्रतिबंध है, लेकिन कारोबारी चोरी चुपके आतिशबाजी के सामान बेच भी रहे हैं।
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