जनपद में हर दूसरे दिन हो रहीं घटनाओं ने लोगों का चैन छीन लिया है। घटनाओं से बेल्हा सुलग रहा रहा है। मामूली विवादों को तूल दिया जा रहा है। बवाली लोग धर्म मजहब के साथ मोहब्बत से रहने वाले लोगों के बीच नफरत के बीज बो रहे हैं। ऐसे हालात के लिए पुलिस भी काफी हद तक जिम्मेदार है। जो सब कुछ जानते हुए भी ऐसे लोगों को समय पर सबक नहीं सिखाती। करीब एक माह से जनपद में हर दूसरे दिन छोटी बड़ी घटनाओं ने लोगों को चैन छीनकर रख दिया है। हाल ही में नगर कोतवाली के अचलपुर में शिव मंदिर की प्रतिमा क्षतिग्रस्त कर बवाल कराने की कोशिश की गई। हालांकि लोगों की समझदारी से बड़ा बवाल टल गया।
इसके बाद व्यापारी नेता महादेव केसरवानी को गोली मारी गई। व्यापारियों ने सूझबूझ का परिचय दिया। आसपुर देवसरा इलाके में धार्मिक स्थ्ल के निर्माण को लेकर कहासुनी ने विवाद का रूप धारण किया। लालगंज के इटौरी में एक युवक का मामूली विवाद में कत्ल कर दिया गया। इससे दो वर्गों के बीच तनाव बढ़ गया। रानीगंज में एक ही दिन बसहा और भागीपुर में दलितों को मारापीटा गया। अभी ये घटनाएं थमी नहीं थी कि सांगीपुर थाना क्षेत्र में बाबा घुइसरनाथ की नगरी उपद्रव से जल उठी।सवाल यह उठता है कि अधिकारी बराबर मातहतों को छोटे विवादों पर नजर रखने और उसे सुलझाने का निर्देश देते रहते हैं तो फिर मातहत अपने अधिकारियों के आदेश की अवहेलना क्यूं करते हैं। कुंभापुर और रानीगंज में घटित घटना को यदि समय रहते स्थानीय पुलिस काबू में कर लेती तो इतना बड़ा बवाल नहीं होता। फिलहाल पंचायत चुनाव की आहट के साथ ही माहौल बिगाड़ने की कोशिश जारी है। ऐसे में अफसरों के आदेश का पालन कर ही थानेदार इलाके में अमन चैन कायम रख सकते हैं।