लालगंज तहसील में ओलावृष्टि चेक के घोटाले की जांच अब क्राइम ब्रांच सेल नहीं करेगी। अब इस मुकदमे की विवेचना सीओ लालगंज को सौंपी गई है। तहसील प्रशासन बार- बार मांगने के बाद भी चेक से जुड़े दस्तावेज विवेचक को उपलब्ध नहीं करा रहा था।
गत वर्ष रबी की फसल तैयार होने के दौरान ही ओलावृष्टि हुई थी। इससे आलू और रबी की फसल बर्बाद हो गई थी। शासन ने ओलावृष्टि से परेशान किसानों को राहत पहुंचाने के लिए आर्थिक मदद का ऐलान किया था। हर तहसील में किसानों को देने के लिए रुपये भेजे गए। लालगंज तहसील में 13.50 लाख ओलावृष्टि की धनराशि के चेक के गबन का मामला उजागर हुआ था। इस मामले में पूर्व जिलाधिकारी के आदेश पर तत्कालीन तहसीलदार संतोष सोनकर, लेखपाल रामचंद्र व प्रदीप सिंह के खिलाफ चेक की धनराशि अलग-अलग नामों से जारी कर गबन करने का मुकदमा भी दर्ज किया गया था। इस मामले की विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।
विवेचना कर रहे निरीक्षक ने कई बार तहसील प्रशासन से जांच में सहयोग की मांग करते हुए चेक से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग की, लेकिन तहसील प्रशासन ने विवेचक को पर्याप्त अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया। इस बात की जानकारी विवेचक ने अधिकारियों को दी। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने अब मामले की विवेचना लालगंज सीओ को सौंप दी है। उन्हें निर्देश दिया गया है कि हर हाल में दर्ज मुकदमे से संबंधित अभिलेख लेकर गहनता से जांच करें। इतना ही नहीं कितनी धनराशि किसानों को आवंटित की गई है, उसका भी ब्यौरा जुटाया जाए।