जिले के एक युवक की लाश मेरठ में पेड़ से लटकती मिली। गाजियाबाद से उसका अपहरण हुआ था। घटना से पहले उसने चचेरे भाई को फोनकर कहा था कि भैया मुझे बचा सकते हो तो बचा लो, रात में ये लोग मार देंगे। मुझे एक कमरे में बंद कर रखा है। शरीर से खून निकाल लिया है। चचेरे भाई से रोते हुए वह बचाने के लिए मदद मांगता रहा, लेकिन तलाश में जुटी पुलिस उस तक नहीं पहुंच सकी। मंगलवार को जिलाधिकारी आवास पहुंचे ग्रामीणों ने घटना की न्यायिक जांच कराने की मांग की।
मानधाता थाना क्षेत्र के पूरेलाल निवासी छेदीलाल गिरि गाजियाबाद के लालकुंआ में काम करता था। दो माह पहले उसका इकलौता बेटा अखिलेश गिरि (22) भी काम-काज के सिलसिले में गया था। वह एक कंपनी में काम करने लगा था। उसकी मां शीलू का कहना है कि 26 अक्तूबर को उसके बेटे अखिलेश का कुछ लोगों ने अपहरण कर लिया। दूसरे दिन पिता ने पुलिस को अनहोनी की आशंका जताते हुए तहरीर दी। सोमवार दोपहर अखिलेश ने अपने चचेरे भाई जीतेंद्र गिरि के पास फोन कर बताया कि उसे एक कमरे में बंधक बनाकर रखा गया है। बात करते हुए अखिलेश रोने लगा। बताया कि उसके शरीर का खून लोगों ने निकाल लिया है।
यदि उसे बचाया नहीं गया तो रात में उसे मार देंगे। उसे किसी भी तरह बचा लो, नहीं तो ये लोग उसकी हत्या कर देंगे। बाद में उसका मोबाइल बंद हो गया। मंगलवार सुबह अखिलेश की लाश मेरठ के खरखोटा थाना क्षेत्र में पेड़ से लटकती मिली। उसकी जेब में मोबाइल मिला तो पुलिस ने परिवार के लोगों को बताया कि अखिलेश ने खुदकुशी कर ली है। यह खबर मिलते ही गांव में सनसनी फैल गई। परिवार के लोग मेरठ के लिए रवाना हो गए। मामले में पुलिस की लापरवाही से आक्रोशित ग्रामीण मृतक की मां शीला देवी के साथ जिलाधिकारी आवास पर पहुंचे। ग्रामीणों ने घटना की न्यायिक जांच कराने के लिए मेरठ व गाजियाबाद पुलिस से बात करने की गुहार लगाई।