कुंडा कोतवाली के पंचपेड़ा जमेठी गांव में पारिवारिक कलह से तंग विवाहिता ने अपने दो साल के बेटे के साथ जहर खाकर जान दे दी। मायके वालों ने ससुरालियों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और जहर देकर मारने का आरोप लगाया है। विवाहिता के भाई की तहरीर पर पुलिस ने पति समेत ससुरालियों के खिलाफ केस दर्ज किया है।
कुंडा कोतवाली के पंचपेड़ा जमेठी निवासी अशोक कुमार यादव की शादी नेहा यादव (30) पुत्री रामदुलारे निवासी धिगईपुर सरायछत्ता संग्रामगढ़ के साथ फरवरी 2013 में हुई थी। शादी के बाद दोनों परिवारों में दहेज को लेकर अनबन हो गई। कई बार इस मुद्दे को लेकर पंचायत भी हुई थी। इस दौरान नेहा का एक बेटा अंश पैदा हो गया। दहेज को लेकर नेहा का गुरुवार को पति के साथ सास-ससुर से भी विवाद हो गया। सूचना मिलने पर शाम को नेहा का भाई पहुंचा और सभी को समझाने के बाद कुछ सामान देकर समझौता करा दिया।
इस दौरान गांव के प्रधान भी मौजूद थे। देर शाम फिर से नेहा का ससुरालीजनों से फिर विवाद हो गया। रात में गुस्से में आकर उसने अपने दो साल के बेटे को जहर देने के बाद खुद भी खा लिया। आधी रात को उनकी हालत खराब हुई तो परिजन सीएचसी कुंडा ले गए, जहां हालत गंभीर देख चिकित्सकों ने इलाहाबाद रेफर कर दिया। रास्ते में मां-बेटे की मौत हो गई। इसकी सूचना मिलने पर भोर में ही मायके के लोग भी आ गए।
बेटी को मृत देख उनके सब्र का बांध टूट गया और वह हंगामा करते हुए दहेज के लिए प्रताड़ित करने और जहर देकर मारने का आरोप लगाने लगे। मौके पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह उन्हें समझाकर शांत कराया। बाद में पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। नेहा के भाई अभयजीत की तहरीर पर पति अशोक, ससुर रामदास, सास जानकी देवी व जेठानी संगीता पत्नी श्रवण कुमार के खिलाफ जहर देकर मारने और दहेज के लिए प्रताड़ित करने का केस दर्ज किया गया है।
ग्रामीणों की टिप्पणी पर भड़के मायकेवाले
कोतवाली क्षेत्र के पंचपेड़वा जमेठी में नेहा के शव को उठाने के दौरान उसके भाई आक्रोश में मुकदमा दर्ज कराने की बात कह रहे थे। इस दौरान किसी ग्रामीण ने कह दिया कि जो करना है कर लो। इस पर मायके पक्ष के लोग उग्र हो गए और हंगामा करना शुरू कर दिया। पुलिस ने सभी को समझाकर किसी तरह शांत कराया और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पति की बेरुखी से तंग आकर चुना मौत का रास्ता
पति की बेरुखी से तंग आकर नेहा ने मौत का रास्ता चुना। शुक्रवार को घटना के बाद इस बात की चर्चा जोरों पर रही। लोकलाज के भय से नेहा को परिवार से जोड़ने का दबाव बनाया जाता रहा। कोई विकल्प न देखकर उसने अंतिम रास्ता चुना। यहां तक कि नेहा की मां और उसके भाई बार-बार पति पर यह आरोप लगाते रहे।
कुंडा के पचपेड़ा निवासी अशोक यादव तीन भाइयों में सबसे छोटा है। शादी के बाद से ही उसका मन नेहा के बजाए कहीं और लगा था। कई बार उसने नेहा को साथ न रखने की बात खुलकर कही थी। बावजूद इसके पारिवारिक और सामाजिक दबाव में वह कुछ कर नहीं पा रहा था। वह ज्यादातर मुंबई में ही रहता था। वहां रहकर वह न तो नेहा को कोई खर्च भेजता था और न ही उससे ज्यादा बात करता था। इसके चलते नेहा बार-बार मायके जाती थी। यही नहीं सास-ससुर भी उसे सहारा देने के लिए तैयार नहीं थे। उसे अलग कमरा दिया गया था, जहां वह अपने बच्चे को लेकर अकेले ही रहती थी। कई बार उसके मायके से उसे खाने पीने के सामान और कपड़े आते थे। यहां तक कि घटना के दिन भी उसका भाई उसके लिए साड़ी और खाने-पीने के सामान लेकर आया था। गांव के सामने हुई बातचीत के दौरान उसने बहन को ही परिवार को संजोने की बात कही थी। कहीं से रास्ता न मिलते देख नेहा ने मौत का रास्ता चुन लिया।