प्रतापगढ़। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में भर्ती मरीज की मौत के बाद तीमारदारों ने जमकर बवाल काटा। डाक्टरों पर हमलावर हो गए। भयभीत डॉक्टर और फार्मासिस्ट इमरजेंसी छोड़कर भाग निकले। बवाली तीमारदारों ने कक्ष में तोड़फोड़ करने के दौरान भर्ती अभिलेख फाड़ डाले। मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों को भी धमकाया। करीब डेढ़ घंटे बाद नगर कोतवाली से फोर्स पहुंचने पर डाक्टर काम पर लौटे।
जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रविवार की देर रात वार्ड में भर्ती एक मरीज को देखने के लिए कंधई थाना क्षेत्र से तीन लोग पहुंचे थे। वह अपने परिचित मरीज को देख ही रहे थे तभी सुलतानपुर में हुई दुर्घटना में घायल युवक को इमरजेंसी वार्ड में लाया गया। डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। रोते बिलखते परिवार के लोग शव लेकर बाहर निकलने लगे। तभी इमरजेंसी वार्ड में सुबह से भर्ती रामसिंह निवासी चौपई थाना कंधई की भी सांसें थम गईं। उसकी बेटी सुनीता पिता की मौत पर रोते बिलखते हुए इलाज में लापरवाही का आरोप लगाने लगी। मृत रामसिंह की बेटी की मदद में कंधई इलाके के रहने वाले तीनों युवक हंगामा करने लगे। इलाज में लापरवाही और रुपये की वसूली का आरोप लगाते हुए स्वास्थ्यकर्मियों को मारने के लिए दौड़ा लिया। इमरजेंसी में मौजूद चिकित्सक एके सिंह व फार्मासिस्ट राजन कुमार जान बचाकर भागे। उनके पीछे स्टाफ नर्स भी वार्ड से भाग निकली। बवाल करने वाले लोग कक्ष में कुर्सी मेज पलटने लगे। मेज पर रखे भर्ती व रेफर के कागजात फाड़ डाले। बवाल की खबर मिलने पर जिला अस्पताल चौकी प्रभारी और मकंद्रूगंज चौकी प्रभारी भागकर पहुंचे। बवाल करते हुए डॉक्टर को मारने के लिए दौड़ाने वाले तीमारदार पुलिसकर्मियों को भी धमकाते हुए गालीगलौज करते रहे।
करीब डेढ़ घंटे तक अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल कायम रहा। मामले की जानकारी के बाद शहर कोतवाल भारी फोर्स के साथ अस्पताल पहुंचे। हालांकि उनके पहुंचने से पहले ही अस्पताल में बवाल करने वाले जा चुके थे। काफी मशक्कत के बाद सहमे डॉक्टर काम पर लौटे। जिसके बाद मरीजों का उपचार फिर से प्रारंभ हो सका। ईएमओ एके सिंह ने बताया कि मरीज के तीमारदार जबरन हंगामा करने लगे। जिस मरीज के इलाज में लापरवाही का आरोप लगा रहे थे, उसे दोपहर में ही रेफर किया जा चुका था।