एआरटीओ कार्यालय में सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के लिए लुटेरों ने सुनियोजित प्लान बनाया था। तभी तो वे घटना को अंजाम देने के बाद आसानी से लूटे गए 22 लाख रुपये लेकर भागने में कामयाब हो सके। उपसंभागीय परिवहन कार्यालय में गुरुवार की शाम कर्मचारी को गोली मारकर 22 लाख रुपये लूटने की घटना लुटेरों का सुनियोजित प्लान था। उनके दुस्साहस को देखते हुए ऐसी आशंका जताई जा रही है कि इसके लिए वे कई दिनों से रेकी कर रहे थे। उन लोगों को पहले से ही पता था कि 31 मार्च को अधिक रुपये जमा होंगे। जिसे लूटा जा सकता है।
कैशियर धर्म प्रकाश तिवारी व स्वीपर रज्जन प्रसाद हमेशा कैश जमा करने के लिए बैंक जाते थे, लेकिन वे तीन से चार बजे के बीच ही बैंक के लिए निकलते थे। लोगों की मानें तो लुटेरे तीन घंटे से ही कार्यालय के इर्द गिर्द मंडरा रहे थे। बाइक चलाने वाला हेलमेट लगा रखा था और नकाबपोश बदमाश इधर उधर घूम रहा था। चूंकि शाम पांच बजे तक कार्यालय बंद हो गया। केवल कर्मचारी व आसपास के दुकानदार ही थे। मौका अच्छा देख नकाबपोश लुटेरा ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुए रुपये से भरा बैग लूटकर भाग निकला। वारदात को अंजाम देने के तरीके से पता चलता है कि वे कई दिनों से रेकी कर रहे थे। अक्सर अधिक रुपये जमा करने के लिए कैशियर अपनी कार से स्वीपर रज्जन के साथ बैंक जाता था।
रुपये जमा करने की जिम्मेदारी एआरटीओ की
एआरटीओ कार्यालय का कैश बैंक में जमा करने की जिम्मेदारी उप संभागीय परिवहन अधिकारी की है। मौजूदा समय में एआरटीओ के पद पर एसपी यादव तैनात हैं। गुरुवार 31 मार्च को क्लोजिंग का दिन होने के बाद भी वे कार्यालय में मौजूद नहीं थे। जबकि रुपये जमा करने की जिम्मेदारी एआरटीओ की होती है। उन्होंने अपने अधिकार से यह काम कैशियर को दे रखा था। यदि एआरटीओ खुद होते तो शायद घटना बच जाती।