सीएमओ और सीएमएस को पता नहीं और अस्पताल में वाहन स्टैंड संचालित हो गया। सोमवार को जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों के साथ तीमारदारों से वाहन स्टैंड के नाम पर गुंडागर्दी की जाती रही। सवाल करने पर संचालक सीएमओ का पत्र दिखाता रहा। रस्सी बांधकर लोगों से वसूली होती रही। विरोध करने वाले लोगों से हाथापाई तक की नौबत आई।
जिले में चार जनवरी को आदर्श आचार संहिता लागू हुई। इसके पहले जिला अस्पताल में न तो वाहन स्टैंड था और न इसके लिए सीएमएस कार्यालय से कोई टेंडर ही निकाला गया था। सोमवार को जिला अस्पताल में सीएमओ की ओर से सीएमएस को भेजे गए पत्र को दिखाते हुए कुछ लोगों ने वाहन स्टैंड संचालित कर दिया।
वे मरीजों की बाइक, चार पहिया वाहन स्टैंड में खड़ा कर रुपये भी वसूलते रहे। यदि कोई विरोध करता तो वे उसके साथ हाथापाई करने पर अमादा हो जाते। इस बाबत जिला अस्पताल के सीएमएस एमबी सिंह अनभिज्ञता जताई। लोगों से जबरन गुंडई कर संचालक के गुर्गे बाइक या कार से आने वाले मरीजों को गेट पर ही रोक लेते थे। जबरन उनकी बाइक और कार को पार्किग स्थल पर खड़ी कराई जाती थी।
जिला अस्पताल में वाहन स्टैंड संचालन के लिए न तो किसी प्रकार का टेंडर निकाला गया और न ही किसी को संचालन के लिए निर्देश दिया गया है। अगर संचालन हो रहा है तो गलत हैं। संचालक के खिलाफ कार्रवाई के लिए एसपी को पत्र लिखा जाएगा।
महेन्द्र विक्रम सिंह, सीएमएस जिला अस्पताल
वाहन स्टैंड संचालन के लिए जिला अस्पताल की ओर से टेंडर निकाले जाने व संचालन करने के इच्छुक दो लोगों को सीएमएस के पास पूर्व में भेजा था। वाहन स्टैंड मेरा कोई मतलब नहीं होता है। यदि वाहन स्टैंड हो जाएगा तो वाहनों की चोरी और जाम लगने की समस्यां दूर हो जाएगी।
यूके पांडेय, सीएमओ।