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रार में दांव पर महिलाओं की आबरू

Mon, 20 Jun 2016 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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जमीन, जायदाद, वर्चस्व और रंजिश की रार में लोग अपने ही घर की महिलाओं की आबरू दांव पर लगा दे रहे हैं। कई मामलों में ऐसा देखने में आया है कि लोगों ने विवाद के बाद घर की किसी महिला को आगे कर विरोधी पर दुष्कर्म का इल्जाम जड़ दिया। बाद में सारी कहानी झूठी निकली। जिला महिला अस्पताल से मिले आंकड़े भी इसकी पुष्टि कर रहे हैं। मार्च 2015 से 2016 तक अस्पताल में दुष्कर्म के कुल 70 मामले आए,  लेकिन एक में भी पुष्टि नहीं है। डाक्टरों के मुताबिक पीड़िता की 72 घंटे के भीतर जांच न होना भी इसका एक कारण हो सकता है। जिले में छोटी-छोटी बात को लेकर कहासुनी व मारपीट जैसी घटनाओं में विरोधियों को फंसाने के लिए महिलाओं को आगे कर दिया जा रहा है। अपनी इज्जत व मर्यादा को दांव पर लगाकर महिलाओं से विरोधियों पर दुष्कर्म या फिर छेड़खानी करने जैसे गंभीर आरोप लगा दिए जा रहे हैं। जिला अस्पताल के आंकड़े देख पुलिस भी परेशान है।
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72 घंटे के भीतर पीड़िता की जांच होना जरूरी
जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉक्टर सुलभा पाठक ने बताया कि पुलिस जिन महिलाओं को लेकर आती है उनका मेडिकल किया जाता है। यहां मेडिकल करने के बाद डॉक्टर उसे जांच के लिए लैब भेज देते हैं। रिपोर्ट लैब से तैयार होकर आती है। रिपोर्ट के आधार पर हम लोग कोर्ट में अपना बयान भी देने के लिए जाते हैं। वैसे तो ज्यादातर दुष्कर्म के मामले फर्जी रहते हैं। या फिर पुलिस की लेटलतीफी के कारण पुष्ट नहीं हो पाता है। दुष्कर्म का मेडिकल 24 से 72 घंटे के अंदर कराया जाए तो सही रिपोर्ट मिल सकती है। 72 घंटे के बाद मेडिकल कराने पर पुष्टि नहीं होती है। बेल्हा की पुलिस ज्यादातर पीड़िताओं को 72 घंटे के बाद मेडिकल करवाने के लिए लेकर आती है।
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