जिले के कुछ लोग मोटी कमाई के लिए सई नदी के अस्तित्व के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। नदी का जलस्तर घटते ही जिले के कई स्थानों पर तेजी से खनन हो रहा है। जिससे सई नदी की धारा भी मुडने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। बालू ट्रकों पर जेसीबी से लादकर दूसरे जिलों व प्रदेशों में बिकने के लिए भेजी जा रही है। मुफ्त की बालू से लोग मालामाल हो रहे हैं। प्रशासन की अनदेखी से सई नदी के बहाव पर खतरा मंडरा रहा है।
जिले के लालगंज तहसील की सीमा में सई नदी प्रवेश करती है, जो जौनपुर जनपद की ओर जाती है। इस नदी के तट पर अभी तक लोग खेती किसानी करते थे लेकिन अब मोटी कमाई के चक्कर में दबंग लोग मनमानी कर सई नदी के अस्तित्व को मिटाने पर उतर आए हैं। ग्रामीण अंचलों की बात ही छोड़िए, शहर के करीब ही अवैध खनन का कार्य जोर शोर से चल रहा है। जिलाधिकारी समेत आला अधिकारियों के कार्यालय व आवास से महज एक दो किमी की दूरी पर बेल्हाघाट, कादीपुर, जिरियामऊ और पूरे ईश्वरनाथ में सई नदी की बालू निरंतर निकाली जा रही है।
बेखौफ दबंग दिन में भी बालू निकालने का काम कर रहे हैं। जबकि पुल से होकर अफसर व कर्मचारी सुबह से लेकर देर शाम तक गुजरते रहते हैं। कोई अवैध खनन करने वालों पर डंडा चलाना तो दूर देखने तक का समय नहीं निकाल सका। रविवार को सई नदी के भीतर दो ट्रैक्टर ट्राली पर मजदूर बालू लाद रहे थे। नदी में बालू लादने वाले मजदूर कैमरे में फोटो कैद होते देख भागने लगे। सई नदी से बालू निकालने के बाद बाग में उसे डंप कर रखा गया था। ग्रामीणों की मानें तो अवैध खनन का यह खेल काफी दिनों से चल रहा है। सई नदी से बालू निकालकर उसे ट्रक के जरिए दूसरे प्रदेश और जिलों को भेजी जाती है।
फावड़ा, बेलचा छोड़ भागे मजदूर
सई नदी के भीतर बालू का अवैध खनन करने वाले मजदूर रविवार को कैमरा देख्ाते ही भागने लगे। बहुत कुरेदने पर बताया कि वे लोग मछली मारने के लिए जाल लगाने आए हैं। हड़बड़ी में वहां से जाते वक्त मजदूर फावड़ा और बेलचा वहीं छोड़ गए। यहां रविवार की सुबह से लेकर दोपहर तक करीब 25 ट्रैक्टर बालू निकाली गई थी।
जेसीबी से ट्रकों पर बालू होती है लोड
सई नदी की बालू बाहर घनफिट के हिसाब से बिकती है। दिन में कार्रवाई के डर से बाग या दूसरे स्थानों पर डंप की गई सफेद बालू रात के अंधेरे में ट्रकों पर जेसीबी से लोड की जाती है ताकि किसी को भनक न लग सके। आसपास के लोग दुश्मनी के डर से शिकायत करने से बचते हैं।
मिट्टी का भी हो रहा अवैध खनन
जिले के अधिकारियों की नाक के नीचे अवैध खनन का खेल कई सालों से चल रहा है। इस खेल की जानकारी स्थानीय पुलिस को रहती है लेकिन सांठगांठ के कारण कोई कुछ नहीं बोलता। भोर से ही ट्रैक्टर ट्राली के जरिए मिट्टी का अवैध खनन शुरू हो जाता है। पूरे ईश्वरनाथ, दहिलामऊ, पटखौली, कादीपुर, खजुरनी, भंगवा, जोगापुर व पूरे माद में मिट्टी का अवैध खनन होता है। शहर में निर्माणाधीन मकानों में मिट्टी पहुंचाई जाती है। एक ट्रैक्टर मिट्टी की कीमत सात सौ रुपये ट्राली तक ली जाती है। मिट्टी के जरिए मोटी कमाई करने वाले लोग किसानों को संकट में डाल रहे हैं। रास्ता तो खराब करते ही हैं। उपजाऊ मिट्टी के कटान से बगल के खेतों को नुकसान पहुंचाते हैं।
मुड़ सकती है नदी की धारा
खीरीबीर व किशुनदासपुर घाट पर अवैध खनन जारी है। सई नदी की बालू निकालने के दौरान अवैध खनन करने वाले यह नहीं देखते कि नदी की बालू निकालने से सई की धारा शहर की ओर मुड़ जाएगी। जिससे बाढ़ आने पर जल्द शहर की ओर पानी आएगा। अवैध खनन करने वालों को सिर्फ अपनी जेब भरने से मतलब है।