8000 कक्ष निरीक्षकों की तैनाती कर बोर्ड परीक्षा संपादित कराने की तैयारी पर कक्ष निरीक्षकों की अनुपस्थिति ने पानी फेर दिया। कई केंद्रों पर कक्ष निरीक्षक गए ही नहीं। इनकी अनुपस्थिति बराबर बनी हुई है। गौर करने वाली बात यह है कि विभाग ऐसे कक्ष निरीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का ढिंढोरा पीट रहा है, जबकि कार्यालय पर अब तक गैरहाजिर कक्ष निरीक्षकों का डाटा ही नहीं है।
यूपी बोर्ड परीक्षा संपादित कराने को लेकर विभाग की ओर से इस बार पुख्ता इंतजाम किए जाने का दावा किया गया था। नकल पर रोक लगाने के लिए पिछली बार बने 334 परीक्षा केंद्रों के सापेक्ष इस बार सिर्फ 218 केंद्र बनाए गए। विभाग का मानना था कि कम केंद्र होने पर पर पर्याप्त कक्ष निरीक्षक रखे जा सकेंगे और इसके साथ ही परीक्षा के दौरान सहजता से उनकी पड़ताल भी हो सकेगी। इसे ध्यान में रखकर 218 परीक्षा केंद्रों के सापेक्ष 8000 कक्ष निरीक्षक तैनात किए गए। कक्ष निरीक्षकों को बकायदा कोड दिया गया था। यह भी तैयारी की गई थी, जिस सब्जेक्ट का जो विशेषज्ञ होगा, उसकी ड्यूटी उस विषय मेें नहीं लगेगी। इसके अलावा 51 अतिसंवेदनशील व संवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर 51 स्टेटिक्स एवं 16 सेक्टर मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई। 25 परीक्षा केंद्रों पर विशेष नजर रखने की हिदायद दी गई थी।
विभागीय अधिकारियों ने अनुपस्थित कक्ष निरीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया था, मगर परीक्षा के मध्य चरण तक यह व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है। परीक्षा के शुरुआत से ही कक्ष निरीक्षकों की मनमानी जारी रही। इसके चलते कहीं चपरासी तो कहीं केंद्र व्यवस्थापक को उत्तरपुस्तिकाएं बांटनी पड़ीं। कई स्थानों पर इससे भी भारी अव्यवस्था बनी रही। इसे लेकर विभागीय अधिकारियों ने ऐसे उदासीन कक्ष निरीक्षकों की कुंडली तैयार करने का निर्देश दिया था। मगर अफसरों का यह निर्देश केंद्र व्यवस्थापकों ने दरकिनार कर दिया। कार्यालय पर कर्मचारियों से इस बाबत पूछताछ करने पर भी माकूल जवाब नहीं मिल पा रहा है। जबकि विभागीय अफसर बगैर विवरण के ही अनुपस्थित रहने वाले कक्ष निरीक्षकों के खिलाफ कार्रवाई का ढिंढोरा पीट रहे हैं।