बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक शाहबरी में तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने आधा दर्जन गांवों के 64 किसानों को बगैर लोन लिए ही कर्जदार बना दिया। कर्जमाफी में सत्यापन के लिए गांव में टीम पहुंचने पर इसका सनसनीखेज खुलासा हुआ है। अधिकारियों की पहल पर विजलेंस टीम कैंप करके अभिलेखों का परीक्षण कर रही है। फिलहाल ऐसा माना जा रहा है कि फर्जीवाड़े की परत अभी और भी उधड़ सकती है।
बडौदा उप्र ग्रामीण बैंक शाहबरी सांगीपुर में संडवा चंद्रिका के कोठानेवढ़िया, पचखरा और सांगीपुर विकास खंड के कल्यानपुरकला, सरायलालशाह, सरुवा, नेवादा, पूरेनारायणदास गांव के लगभग 64 किसानों की फोटो और अभिलेख लगाकर करोड़ों रुपये का घपला उजागर हुआ है। अधिकारियों की जांच में खुलासा हुआ है कि स्थानीय दलालों की मदद से तत्कालीन शाखा प्रबंधक और बैंक के अन्य कर्मचारियों ने मिलकर ऋण की धनराशि का बंटवारा कर लिया था। किसानों तक इनकी भनक न लगे, इसके लिए शाखा के तत्कालीन कर्मचारियों को भी हिस्सा दिया गया था। कर्जमाफी के सत्यापन की फाइल लेकर कर्मचारी जब गांव पहुंचे, तो उनके होश उड़ गए। फर्जीवाडे़ की खबर आम होते ही जिला प्रशासन हतप्रभ रह गया। वर्ष 2013-14, 2014-15,2015-16 में तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने इन किसानों के नाम करोड़ों रुपये का फर्जी ऋण स्वीकृत किया है। वर्तमान में उनकी तैनाती शाहजहांपुर में हैं। शनिवार को मीराभवन चौराहा स्थित आरएम कार्यालय में अधिकारी घपले की जांच करते रहे।बैंक में फर्जीवाडे़ का खुलासा छह माह पहले ही हो गया था। दरअसल में शाखा प्रबंधक के रुप में मो. अनस की तैनाती होने पर ही फर्जीवाडे़ का खुलासा हुआ था। मगर बैंक अधिकारी फर्जीवाडे़ में लिप्त शाखा प्रबंधक की अंदर से मदद करते रहे। इसी के चलते अभी तक न तो जांच पूरी हो पाई है और न ही कोई कार्रवाई हुई है। बड़ौदा उप्र ग्रामीण बैंक की विजलेंस टीम ने जांच की कमान अपने हाथ में ले ली है। अभिलेखों को जांचने के साथ ही गांव -गांव जाकर किसानों से तहकीकात कर रही है। जांच टीम में शामिल अधिकारी तीन दिन में रिपोर्ट देने की बात कह रहे हैं।