मानधाता बाजार में आए दिन मारपीट के जरिए माहौल बिगाड़ने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने में पुलिस नाकाम रही। बवालियों पर शिकंजा कसने के बजाय पुलिस की ओर से छूट दी जाती रही। इसका नतीजा यह हुआ कि मंगलवार की शाम बाजार में भारी बवाल हो गया। दोनों तरफ से पथराव में सात लोग घायल हो गए। घटना को लेकर अभी भी तनाव बना हुआ है।
मानधाता बाजार में कई वर्षों से छोटे-मोटे विवाद भी तूल दिए जाते रहे हैं। चाहे वह दो लोगों के बीच ही क्यों न हो। मानधाता बाजार के साथ ही आसपास के इलाके में भी मामूली विवाद को भी साम्प्रदायिक रंग देने का भरसक प्रयास किया जाता रहा है। 21 दिसंबर को अनिल गुप्ता और महफूज के बीच हुई घटना के बाद भी पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। केवल मुकदमा दर्ज कर विवेचना तक ही पुलिस की कार्रवाई सिमट गई। इससे मारपीट करने वालों के मन से पुलिस का खौफ भी कम होता गया। घटना के बाद भी बाजार में कई मामलों को लेकर भी तनातनी बरकरार थी। इसमें एक जमीन को लेकर भी सोमवार को दोनों पक्षोें के बीच मनमुटाव हुआ था।
पूर्व प्रधान रिजवान ने बहुत पहले बाजार निवासी जमुना केसरवानी से एक जमीन खरीदी थी। जिसे उसने तेज बहादुर सिंह के हाथ बेच दिया था। जिसकी सोमवार को पैमाइश हुई थी। यह बात भी दोनों पक्षों को खटक रही थी। पुलिस अधीक्षक माधव प्रसाद के मुताबिक शाम को तेज बहादुर के साथ महफूज को बैठा देख अनिल पक्ष के लोगों ने पुलिस को फोन कर दिया। पुलिस के पहुंचने के पहले मारपीट होने लगी थी। बाजार के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस ऐसे बवालियों पर शिकंजा कसती तो शायद आज यह नौबत न आती।