इंस्पेक्टर अनिल कुमार की हत्या का राज कार चालक नर्देश्वर के सीने में दफन है। दूसरे दिन ही पुलिस को गच्चा देकर वह फरार हो गया। उसे खोजने में लगी एसटीएफ को भी कामयाबी नहीं मिल सकी। पुलिस वाले भी उसका बयान दर्ज करने के लिए खोज रहे हैं।
पूर्व नगर कोतवाल अनिल कुमार को अधिवक्ता इंद्रमणि शुक्ला की हत्या को लेकर तत्कालीन पुलिस अधीक्षक एसके सक्सेना ने निलंबित कर दिया था। 19 नवंबर को होटल वैष्णवी के नीचे स्थित मॉडल शाप के बाहर इंस्पेक्टर अनिल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को रात में ही धर दबोचा और दोनों को जेल भी भेज दिया। हालांकि घटना के दौरान हुई फायरिंग व खोखे को लेकर पुलिस सही जवाब नहीं दे सकी थी। घटना के समय इंस्पेक्टर के साथ कमरे में मौजूद प्राइवेट कार चालक नर्देश्वर मिश्रा के चेहरे पर बारूद के निशान थे। जो केवल बारह बोर के तमंचे से फायर के बाद ही आ सकते हैं।
वो भी बहुत नजदीक से फायर हुआ हो तब। हालांकि रात में पुलिस अफसरों ने उससे पूछताछ की और इंस्पेक्टर के बगल मौजूद होने के कारण ऐसा निशान आने की बात कहते रहे। परिवार के लोगों ने भी उससे बात की, लेकिन वे उसके जवाब से संतुष्ट नहीं थे। दूसरे दिन ही वह पुलिस को गच्चा देकर फरार हो गया। पुलिस उसकी खोजबीन करती रही, लेकिन वह नहीं मिला। यहां तक कि बाद में एसटीएफ की टीम नर्देश्वर को खोजने के लिए उसके घर आजमगढ़ तक पहुंची, लेकिन वह नहीं मिला। उसका बयान कोतवाली पुलिस भी लेने के लिए परेशान है, लेकिन वह मिल नही रहा। चर्चा है कि नर्देश्वर को घटना की असलियत मालूम है। वह पुलिस से बचने के लिए फरार हो गया। उसके सामने आने के बाद घटना की असलियत खुलने की संभावना है। हालांकि सीओ सिटी मनीष मिश्र का कहना है कि वह अपने स्तर से विवेचना कर रहे हैं। दूसरे गवाहों की तरह उसका भी बयान दर्ज किया जाएगा। उसकी खोजबीन चल रही है।