बाबागंज विकासखंड के रामनगर में पूर्व प्रमुख मनोज शुक्ला और संजय सरोज के बीच वर्ष 2010 से ही पंचायत चुनाव को लेकर विवाद की नींव पड़ गई थी। बुधवार को पांच साल से सुलग रहीं चिंगारी आखिरकार शोला बन गई। जानकारी के बाद भी अधिकारी दोनों पक्षों के खिलाफ पहले से सख्त कार्रवाई नहीं कर सके। रामनगर से वर्ष 2010 में बीडीसी का चुनाव जीतने वाले मनोज शुक्ला बसपा की सरकार में ब्लाक प्रमुख बन गए। बीडीसी चुनाव के दौरान भी मनोज व संजय सरोज के बीच विवाद हुआ था।
यह रंजिश तब से बरकरार है। एक माह पूर्व बीडीसी के चुनाव में संजय की भयाहू अर्चना मैदान में थीं तो पूर्व प्रमुख मनोज शुक्ला ने छेउगहिन देवी को अपना प्रत्याशी बनाया था। प्रचार के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने हो गए थे। फायरिंग और मारपीट की घटना भी हुई थी। बाद में पुलिस ने लाइसेंसी बंदूक कब्जे में ले ली थी। यह विवाद चिंगारी बनकर दोनों पक्षों के बीच सुलग रहा था। बुधवार को प्रधान पद के मतदान के दौरान उनके बीच पनप रही चिंगारी भड़क उठी और वे एक दूसरे को मारने पर उतर आए। लोगों का कहना है कि यदि अधिकारी चाहते तो यह विवाद न हो पाता।