जनपद में दिनोंदिन खाकी का इकबाल घटता जा रहा है। मौका मिलते ही पुलिस पर ग्रामीण धावा बोलने से नहीं चूकते। इन घटनाओं से पुलिसकर्मियों को मनोबल लगातार गिरता जा रहा है। जनपद में पहले भी कई बार खाकी पर हमले हो चुके हैं। जिले में कई सालों से पुलिस का खौफ लोगों के बीच से खत्म होता जा रहा है। हथिगंवा के बलीपुर में सीओ जियाउल हक हत्याकांड के बाद तो इस तरह की घटनाओं में लगातार इजाफा होता जा रहा है। 25 जनवरी को अंतू में दो सगे भाइयों की हत्या को लेकर 26 जनवरी को आक्रोशित लोगों ने पोस्टमार्टम हाउस पर चक्काजाम के दौरान पुलिस पर हमला बोल दिया।
इसमें लालगंज के कोतवाल कुलदीप तिवारी का सिर फट गया। सिपाहियों को भी चोटें आईं। नगर कोतवाली के ही बिहारगंज में सिपाहियों को पीटा गया। अभी यह मामला थमा नहीं था कि कटरामेदनीगंज के लोगों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने सिपाही को मारापीटा और उसके ऊपर गर्म तेल फेंक दिया था। तत्कालीन नगर कोतवाल पहुंप सिंह पर अविश्वास जताते हुए सिपाही ने दूसरे थाने की पुलिस से जांच कराने की गुहार अधिकारियों से लगाई थी। अभी हाल ही में देल्हूपुर में ग्रामीणों ने पुलिस पर पथराव किया था। इससे सीओ रानीगंज डीएल सुधीर का सिर फट गया था। बवाल के दौरान फिर पुलिस ने लाठियां चटकाईं। लालगंज के गाबी महुआबन में भी पुलिस को बवालियों ने आंख तरेरी। मंगलवार की रात पूरे झाऊ में सिपाहियों पर फिर मौका मिलते ही ग्रामीणों ने हमला बोल दिया। इन घटनाओं के बाद पुलिसकर्मियों का मनोबल गिर रहा है। इसके पीछे का कारण पुलिसकर्मी अधिकारियों के सख्त कदम न उठाने को मानते हैं। दरअसल जिले में कहीं भी बड़ी घटना होने पर पहले अधिकारी दो-चार सिपाहियों को मौके पर भेज देते हैं। जब हालात बिगड़ते हैं तो सबको होश आता है। हमला होने के बाद पुलिस अधिकारी जगते हैं तो ताबड़तोड़ दबिश और छापामारी शुरू हो जाती है। हमलावर तो घर से फरार हो जाते हैं, लेकिन इसमें निर्दोष लोग जरूर फंस जाते हैं।