जिले की पुलिस भले ही अभी हाईटेक सुविधाओं से लैस न हो, लेकिन आधुनिकता की तपिश से कोतवाली व थानों में तैनात मुंशी झुलस रहे हैं। उन्होंने मनमानी करते हुए पुराने कालमों को पूरा करने के बजाए उन्हें ही गायब कर दिया है। यहां तक कि पहले अपराध रजिस्टर में अंकित होने वाली खतौनी भी नदारद है। निरीक्षण के दौरान मातहतों की कारगगुजारी की पोल खुल रही है।
गौर करने की बात है कि कोतवाली व थानों में दस प्रकार के रजिस्टर होते हैं। जिसमें रजिस्टर संख्या चार और आठ प्रमुख होते हैं। इसके साथ ही एनसीआर व मुकदमों से संबंधित एक रजिस्टर और भी बनता था। जिसमें थाना क्षेत्र के गांवों के नाम दर्ज होते थे। रजिस्टर के पहले पन्ने से लेकर करीब दस पन्नों तक उसका इंडेस्क बनाया जाता था। इसी रजिस्टर में नामवार का भी कालम होता था। पुलिस अफसरों की मानें तो ऐसे रजिस्टर में हर गांव के नाम दर्ज होते थे और साल के बारह महीनों में दर्ज होने वाले हर गांवों के मुकदमों की लिखापढ़ी की जाती थी। इसके अलावा नामवार रजिस्टर में ऐसे नामों को क्रमवार तरीके से लिखा जाता था।
जिसके खिलाफ मुकदमा दर्ज होता था उसके पहले नाम के अक्षर का इंडेक्स बनाकर संबंधित पेज पर हर माह उस नाम के लोगों का मुकदमा दर्ज किया जाता था। ताकि निरीक्षण के दौरान अधिकारियों के सामने तत्काल रजिस्टर खोलकर आमुक व्यक्ति के नाम से दर्ज तमाम मुकदमों जानकारी दी जा सके। इसके अलावा थानों के अपराध रजिस्टर की खतौनी भी बनती है। जिसका कालम हर दिन भरे जाने का प्रावधान है, लेकिन यह कालम भी मातहत अब महज इसलिए छोड़ने लगे हैं कि सीसीटीएनएस में मुकदमा दर्ज हो रहा है और सबकुछ ऑनलाइन फीडिंग की जा रही है।