रात के साढ़े 11 बजे काम निपटा ही था कि पूरा थाना गोलियों की तड़तड़ाहट से गूंज उठा। थोड़ी ही देर में आवाज तेज हुई तो लगा कोई एसओ को गालियां दे रहा है। बस इतने में संतरी की आवाज उभरी ‘थम, कौन’। आवाज आते ही गालियों की बाढ़ के साथ गोलियां चलीं और कुर्सी सहित संतरी लुढ़क गया। यह देख अंदर कुर्सी पर बैठे दीवान की हालत खराब हो गई। अंदर सोया गार्ड प्रदीप चिल्लाया साहब महादेव को गोली लग गई है। मुंशी आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि वह उठा ही था कि एक बार फिर से कई बम के धमाके हुए। इससे वह ठिठका और दीवार की आड़ लेते हुए बिल्डिंग की जाली के पास पहुंच गया। बाहर बिजली की रोशनी थी।
देखा तो छह लोग हाथ में पिस्टल और तमंचे लेकर फायरिंग कर रहे थे। चार लोग एसओ सहित थाने के सिपाही और दरोगाओं को भी गाली देते हुए ललकार रहे थे और गोलियां चला रहे थे। बीच-बीच में एक व्यक्ति आता और परिसर में बम फेंक देता था। उनके इस अंदाज को देख वह एकदम जड़ रह गया। अपना फोन ढूंढने का प्रयास किया, लेकिन वह मिला नहीं। पता नहीं कितने समय वह खड़ा रहा। थाने से कोई जवाब न मिलने पर हमलावर लोग चले गए। थोड़ी देर में एसओ के साथ सिपाही और दरोगा पहुंचे तो उसके होश ठिकाने आए। सिर पर हाथ रखे मुंशी को बार-बार वह घटना ही याद आ रही थी। उसका कहना है कि अपराधियों के इस तरह के हौसले की तो वह कल्पना ही नहीं कर सकता है।