तेजतर्रार और ईमानदार छवि के माने जाने वाले नवागत पुलिस अधीक्षक अखिलेश कुमार चौरसिया को बेल्हा में पहले ही दिन अग्निपरीक्षा से गुजरना पड़ा। उनके पहले दिन कुर्सी संभालते ही मानधाता इलाका सुलग उठा। कई दिनों की खामोशी बवाल में तब्दील हो गई। जिले में लगातार हो रहीं घटनाओं पर काबू पाना पुलिस के लिए मुश्किल हो रहा है। उपद्रवियों के भीतर से खाकी का खौफ खत्म हो चुका है। वे आए दिन पुलिस से भिड़ जा रहे हैं। पुलिस के सामने ही बड़ी वारदातें हो जा रही हैं। राजनीतिक दबाव से पुलिस अफसरों और कर्मचारियों का हौसला पस्त है। उनका मनोबल लगातर गिर रहा है। खाकी का इकबाल बुलंद करने के लिए ठोस प्रबंध की जरूरत है। नए जोश के साथ नए इरादे की जरूरत है। जिले का कोई न कोई कोना हर तीसरे दिन सुलग रहा है। मारपीट, बवाल, लूटपाट और हत्या जैसी बातें आम हो गई हैं। इन पर काबू पाने के लिए सटीक रणनीति की जरूरत है। ताकि बवाल से पहले ही ऐसे लोगों का पुलिस मंसूबा ध्वस्त कर सके। बदमाश भी लगातार चुनौती दे रहे हैं। उन्हें भी पस्त करना होगा।
सोमवार को पद्मावत एक्सप्रेस से बेल्हा पहुंचे पुलिस अधीक्षक अखिलेश कुमार ने कार्यभार ग्रहण किया। पता चला कि डीजी कानून व्यवस्था की इलाहाबाद में बैठक है। इसके बाद वह इलाहाबाद के लिए रवाना हो गए। उनके कुर्सी संभालते ही कई दिनों की खामोशी सोमवार को बवाल में बदल गई। मानधाता में देशराज की मौत के बाद रविवार से परिजन पप्पू के खिलाफ मुकदमा लिखाने के लिए पुलिस पर दबाव डाल रहे थे लेकिन पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही रिपोर्ट दर्ज करने की बात कह रही थी। एसपी के इलाहाबाद जाने के दौरान ही देल्हूपुर में बवाल शुरू हो चुका था, लेकिन बवालियों को पुलिस ने समझा बुझाकर शांत करा दिया था। कल शाम से सुलग रही आग सोमवार को शोला बन गई। जिसके चलते पुलिस और ग्रामीणों के बीच संघर्ष हो गया। नए एसपी के कार्यभार ग्रहण करने के पहले ही दिन मानधाता में जहां बवाल हो गया और पुलिस को जान बचाने के लिए पीछे हटना पड़ा। वहीं रानीगंज में बालिका का कत्ल और पट्टी में युवक को गोली मारने वालों ने भी पुलिस को चुनौती दी है। लोगों का कहना है कि नए पुलिस अधीक्षक को ऐसे बवालियों पर अंकुश लगाने के लिए ठोस कदम उठाना होगा।