पूर्व बसपा नेता मनोज तिवारी ने मंगलवार को गैंगेस्टर कोर्ट में सरेंडर कर दिया। हाईकोर्ट के आदेश पर लखनऊ से पुलिस उपाधीक्षक के नेतृत्व में भारी पुलिस बल के साथ दीवानी न्यायालय लाया गया। इस दौरान परिसर में समर्थक डटे रहे। भीड़ को देखते ही साथ आए पुलिसकर्मी खासे चौकन्ने दिखे। न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद मनोज को सुरक्षा के बीच नैनी जेल ले जाया गया।
महेशगंज थाना क्षेत्र के नरियावां निवासी मनोज तिवारी गैंगेस्टर के एक मामले में फरार चल रहे थे। पुलिस को काफी दिनों से उनकी तलाश थी। पूर्व बसपा नेता मनोज तिवारी ने खुद की जान को खतरा बताते हुए हाईकोर्ट लखनऊ में एक याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने आदेश दिया था कि मनोज मंगलवार को लखनऊ के डीआईजी के पास पहुंचेंगे। वहां से उन्हें सुरक्षा के बीच प्रतापगढ़ गैंगेस्टर कोर्ट भेजा जाए। जहां वे सरेंडर कर सकें। कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराते हुए मंगलवार को वज्र वाहन से मनोज तिवारी को गैंगेस्टर कोर्ट लाया गया। यहां पहले से ही मौजूद समर्थकों को देख पुलिस अलर्ट हो गई।
गैंगेस्टर कोर्ट के न्यायाधीश की गैरमौजूदगी के चलते मनोज अपने अधिवक्ताओं के साथ जिला जज के समक्ष आत्मसमर्पण किया। जमानत प्रार्थना पत्र पर विचार करते हुए जनपद न्यायाधीश ने सुनवाई के लिए 20 जून की तिथि मुकर्रर कर दी। गैंगेस्टर कोर्ट में अगली पेशी 29 जून को होगी। इसके बाद मनोज को एक दूसरे मामले में सीजेएम कोर्ट में ले जाया गया। जहां सुनवाई के बाद 27 जून की डेट मिली। सुनवाई के दौरान ही मनोज के अधिवक्ता ओम प्रकाश मिश्र समेत दूसरे अधिवक्ताओं ने प्रतापगढ़ जेल न भेजने की अर्जी दी। जिसपर विचार के बाद कोर्ट से मनोज को राहत मिल गई। न्यायालय के आदेश पर उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच नैनी कारागार ले जाया गया। सीओ सिटी एमपी सलोनिया दलबल के साथ मनोज को लेकर नैनी कारागार के लिए रवाना हुए।