बलात्कार जैसी संगीन घटनाओं में पंचायतों के शर्मनाक फैसले अब भी आ रहे हैं। प्रतापगढ़ के अंतू इलाके में एक पंचायत ने अपहरण और रेप की शिकार बनी छात्रा की इज्जत की कीमत 25 हजार रुपये आंकी है। पंचायत का फरमान है कि आरोपी के परिवार वाले यह रकम पीड़ित छात्रा को देंगे और मामला रफा -दफा हो जाएगा। गांववालों का इतना दबाव है कि पीड़ित परिवार ने भी पंचायत का यह तुगलकी फरमान मान लिया है। इधर, पुलिस भी जानकारी होते हुए हाथ पर हाथ धरे बैठे रही।
अंतू इलाके में रहने वाली आठवीं कक्षा की छात्रा को 28 जून को गांव के ही दो युवक अगवा कर ले गए थे। दो जुलाई को वह किसी तरह उन दोनों के चंगुल से छूटकर घर पहुंची। उसने बताया कि उसे उरई जिले में बंधक बनाकर रखा गया था। वहां उसके साथ दुराचार किया गया। आरोप है कि पुलिस ने पिता की तहरीर पर मुकदमा तो लिख लिया मगर आरोपियों का ही पक्ष लिया और पीड़िता को परेशान किया। इस जघन्य कृत्य के लिए छात्रा को ही फटकार लगाई। यह मामला जब गांव की पंचायत के पास पहुंचा तो उसने और भी शर्मनाक हरकत कर डाली। पंचायत ने फरमान सुनाया कि अपहरण और रेप करने वाले दोनों युवकों से छात्रा को 25 हजार रुपये दिलवाकर उन्हें माफ कर दिया जाए। पुलिस से निराश पीड़ित छात्रा के घरवाले पंचायत का फैसला मानने को मजबूर हो गए।
पुलिस की भूमिका भी इस मामले में कम शर्मनाक नहीं रही। अपहरण और रेप की शिकार छात्रा का पुलिस ने मेडिकल टेस्ट तक नहीं कराया। इस मसले पर जब सवाल उठे तो एसओ अंतू रामनरेश यादव ने कहा कि उन्हें दोनों पक्षों के बीच सुलह और पंचायत के फैसले की जानकारी नहीं है। अब जाकर उन्होंने छात्रा का मेडिकल टेस्ट कराने की बात कही है।