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शरारती तत्वों ने तोड़ी अंबेडकर प्रतिमा

Fri, 19 Dec 2014 11:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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फतनपुर थाना क्षेत्र के सुरवा मिश्रपुर में अंबेडकर प्रतिमा तोड़े जाने से लोग आक्रोशित हो गए। सैकड़ों लोगों ने पुलिस के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने प्रतिमा ठीक कराई, इसके बाद लोगोंका गुस्सा शांत हुआ। पुलिस तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।
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सुवंसा से खाखापुर मार्ग स्थित सुरवा मिश्रपुर दूरभाष केंद्र के करीब ग्रामसभा की जमीन पर डा. भीमराव अंबेडकर, पंडित प्रभाकर नाथ द्विवेदी और पूर्व ब्लाक प्रमुख गौरा राम अचल पांडेय की प्रतिमा स्थापित है। गुरुवार रात अराजकतत्वों ने अंबेडकर की प्रतिमा का दाहिना हाथ तोड़ दिया। शुक्रवार सुबह लोगों ने प्रतिमा टूटी देखी तो आक्रोशित हो गए। प्रधानपति सुरेशचंद्र सरोज, बीडीसी सदस्य संजय प्रजापति, अमृतलाल गौतम मौके पर पहुंचे और घटना की सूचना पुलिस को दी। इस दौरान ग्रामीण पुलिस के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। आक्रोशित लोगों का आरोप था कि पुलिस की लापरवाही के चलते अराजकतत्व ऐसा साहस कर सके। एसओ फतनपुर मौके पर पहुंचे। पुलिस को देख लोग उग्र होने लगे लेकिन प्रधानपति और बीडीसी सदस्यों ने लोगों को शांत कराया। इसके बाद पुलिस ने प्रतिमा ठीक कराई। पुलिस ग्रामीणों से बातचीत के बाद तीन संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया। कार्रवाई की मांग को लेकर सैकड़ों लोग कोतवाली पहुंच गए। एसओ के आश्वासन पर सभी लोग लौट गए। सुरक्षा के मद्देनजर प्रतिमा स्थल पर सिपाहियों की ड्यूटी लगा दी गई। एसओ कृष्णदेव ने बताया कि ग्रामीणों ने तहरीर नहीं दी है। तीन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सुरवा मिश्रपुर गांव में 2 अक्तूबर 1990 को ग्रामीणों ने डा. अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित कराई थी। इसके समीप पंडित प्रभाकर नाथ द्विवेदी की प्रतिमा लगी है। बताया जाता है कि वर्ष 1994 में कुछ शरारती तत्वों ने अंबेडकर प्रतिमा को तोड़ दिया था। पुलिस ने एक दर्जन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर दूसरी प्रतिमा लगवाई थी। दूसरी बार बाबा साहब की प्रतिमा तोड़ने से अनुयायी खासा गुस्से में हैं। लोगों का आरोप है कि कुछ लोग शरारतवश प्रतिमा तोड़ रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न की गई तो आंदोलन को बाध्य होंगे। 2 अक्तूबर 2014 को पूर्व ब्लाक प्रमुख राम अचल पांडेय की प्रतिमा स्थापित की गई तो कुछ लोगों ने विरोध किया लेकिन ग्रामीणों के समझाने पर वे मान गए।
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