जिले के थानेदार पीड़ितों को न्याय नहीं दे पा रहे हैं। यही कारण है कि दूरदराज से हर रोज करीब सैकड़ों लोग जिला मुख्यालय पर एसपी और एएसपी के पास गुहार लगाने पहुंच रहे हैं। थानों पर प्रार्थनापत्र की रिसीविंग तो दी जा रही है, लेकिन समस्याआें का निराकरण नहीं हो रहा है। ऐसे में लोग एसपी से गुहार लगाने आते हैं, लेकिन कार्रवाई थानों से ही होने के कारण कम ही लोगों को न्याय मिल पा रहा है। सांगीपुर के असांव की पूर्व प्रधान जुबैदा व उनके समर्थकों को दबंगों के भय के कारण घर छोड़कर पुलिस अधीक्षक से शिकायत करने के लिए मुख्यालय आना पड़ा। उनका आरोप है कि दबंगों के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई नहीं करती। मानधाता थाना क्षेत्र के मदईपुर निवासी रामसेवक पुत्र पंचू यादव का आरोप है कि पुलिस ने जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज कर ली, लेकिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं कर रही।
परेशान रामसेवक ने गुरुवार को डीएम और एसपी से गुहार लगाई। पीड़ित के अनुसार वह कार्रवाई के लिए एसपी से भी दो बार मिल चुका है। कई अन्य थानाें का भी हाल कुछ ऐसा ही है। रानीगंज, पट्टी, देवसरा, कंधई, कोहंडौर, अंतू और मानधाता से तो एसपी ऑफिस पहुंचना आसान है लेकिन यहां तो मानिकपुर, कुंडा, नवाबगंज, हथिगंवा, उदयपुर और सांगीपुर से आने वाले फरियादियों की संख्या कम नहीं है। बीते सप्ताह के फरियादियों की संख्या पर गौर करें तो हर दिन करीब 100 से लेकर 140 लोग पुलिस अधीक्षक, एएसपी पूर्वी व पश्चिमी से मिले हैं। यह सब थानों से निराश होने के बाद ही यहां पहुंचे हैं। इसके अलावा 20 से 30 फरियादी सीओ सिटी या सीओ सदर के पास आते हैं। फरियादियों की भीड़ अधिक होने के कारण एसपी अपने सहयोग के लिए किसी एएसपी पूर्वी या पश्चिमी को बुला लेते हैं। वह भी एसपी के साथ प्रार्थनापत्रों का निस्तारण करते हैं। इस दौरान किसी न किसी थानेदार की सीधे क्लास भी लगती है।