करीब डेढ़ लाख उपभोक्ता जिले को मिल रही बिजली का पूरा हिस्सा उपभोग नहीं कर पा रहे हैं। 19 से 20 प्रतिशत बिजली अनायास ही बर्बाद हो जा रही है। चोरी करने वाले खुलेआम विभाग को चूना लगा रहे हैं। इसे रोकने का ठोस कदम विभाग नहीं उठा पा रहा। यह खुलासा शासन को भेजी गई ‘लाइन लास’ की रिपोर्ट से हुआ है।
बिजली विभाग दो खंडों में बंटा है। विद्युत वितरण खंड प्रथम और द्वितीय। प्रथम खंड शहरी व टाउन एरिया और द्वितीय से ग्रामीण क्षेत्र जुड़े हैं। गर्मी में बढ़ी खपत को देखते हुए वितरण खंड प्रथम ने 30 और द्वितीय ने 40 मिलियन यूनिट बिजली की मांग की है। इस तरह जिले को करीब 70 मिलियन यूनिट बिजली की जरूरत है, जो नहीं मिल पा रही। विभागीय अफसर बताते हैं कि मांग के सापेक्ष जिले को केवल 45 से 40 मिलियन यूनिट बिजली ही मिल रही है। जिसका आधा हिस्सा लाइन लास में बर्बाद हो जाती है।
आधी बिजली की ही आपूर्ति लोगों को मिल पा रही है। शासन को भेजी गई रिपोर्ट के मुताबिक 19 से 20 प्रतिशत बिजली अनायास बर्बाद हो रही है। जिले में बर्बाद हो रही बिजली को बचाने का ठोस कदम प्रशासन नहीं उठा रहा। बताया जाता है कि यदि बर्बाद हो रही बिजली बचा ली जाए तो जिले की बदतर आपूर्ति व्यवस्था में सुधार हो सकता है। मगर इसके लिए अधिकारियों को जीतोड़ मेहनत करनी पड़ेगी।