केंद्रीय कारागार नैनी से गैंगस्टर न्यायालय में पेशी पर आए डबल मर्डर के आरोपी बंदी ने सोमवार को जान देने की कोशिश की। आनन-फानन में खून से लथपथ बंदी को पुलिसकर्मी जिला अस्पताल ले गए। डाक्टरों ने उसका इलाज करने के लिए भर्ती कर लिया। घटना की जानकारी के बाद अफसर हलाकान रहे। मानधाता थाना क्षेत्र के चंघईपुर निवासी अर्जुन सिंह (34) पुत्र जीत बहादुर सिंह ने वर्ष 2010 में पारिवारिक विवाद में लाठी-डंडे से पीटकर दो पट्टीदारों की हत्या कर दी थी। तब से वह जेल में निरुद्ध है। पुलिस ने उसके ऊपर गैंगस्टर भी लगा दिया था। सोमवार को नैनी कारागार से एचसीपी सुमेर यादव पुलिसकर्मियों के साथ अर्जुन समेत अन्य बंदियों कोे पेशी पर लाए थे। दोपहर करीब डेढ़ बजे पुलिसकर्मी अर्जुन को पेशी पर लेकर गैंगस्टर कोर्ट पहुंचे।
न्यायालय परिसर में अचानक अपनी जान देने के लिए अर्जुन ने शीशे की खिड़की पर अपने दाहिने हाथ से प्रहार कर दिया। जिससे उसके हाथ की नस कट जाए। तेज आवाज के साथ ही चीख सुनकर लोग सन्न रह गए। तब तक अर्जुन के हाथ से खून बहने लगा। इससे परिसर में हड़कंप मच गया। आनन- फानन में पुलिसकर्मी उसे लेकर जिला अस्पताल के लिए भागे। डाक्टर अनिल गुप्ता ने उसकी हालत गंभीर बताते हुए प्राथमिक इलाज करने के बाद उसे अस्पताल में भर्ती कर लिया। बंदी का कहना था कि केंद्रीय कारागार में उसका उत्पीड़न किया जा रहा है। वह गंभीर बीमारी से पीड़ित है। यह जानते हुए भी जेल प्रशासन उसे बाहर भेजकर इलाज नहीं करा रहा। जिससे उसकी तबीयत लगातार बिगड़ती जा रही है। इसलिए वह अब जिंदा नहीं रहना चाहता। घटना की जानकारी के बाद नगर कोतवाल हरिपाल सिंह यादव भी अस्पताल पहुंचे और घायल बंदी से पूछताछ की। उन्होंने बताया कि अभी तक कोई तहरीर नहीं मिली है।