आचार संहिता खत्म होने के बाद संपन्न हुआ पहला तहसील दिवस हंगामे की भेंट चढ़ गया। अधिवक्ताआें पर एफआईआर दर्ज कराने वाले तहसीलदार को यहां से हटाने की मांग को लेकर साथियों ने प्रदर्शन किया। हंगामें के चलते तहसील दिवस घंटेभर बाधित रहा और अफरा तफरी मची रही। बुधवार से तहसीलदार को तहसील कैंपस में नहीं घुसने देने का भी अधिवक्ताआें ने ऐलान किया है।
करीब तीन माह पहले तहसीलदार ठाकुर प्रसाद ने तहसील के कुछ अधिवक्ताओं पर मारपीट का आरोप लगाते मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद से अधिवक्ताओं व प्रशासन के बीच तनातनी चल रही है। एफआईआर वापस लेने व तहसीलदार के तबादले की मांग को लेकर अधिवक्ताओं ने हंगामा शुरू कर दिया लेकिन चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद से अधिवक्ता शांत हो गए थे। नई सरकार के गठन के बाद आचार संहिता खत्म होने के बाद मंगलवार को तहसील दिवस प्रारंभ होते ही अधिवक्ता फिर से विफर पड़े। संयुक्त अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष देवी प्रसाद मिश्र की अगुवाई में साथियाें पर दर्ज केस वापस लेने व तहसीलदार ठाकुर प्रसाद के तबादले की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे करीब घंटे भर अफरा तफरी का माहौल बन गया। जिलाधिकारी तक अधिवक्ताआें की मांग पहुंचाने और वार्ता कराने के आश्वासन पर प्रदर्शन शांत हो सका।
इसके बाद अधिवक्ताओं ने अपनी मांग के संबंध में ज्ञापन सौंपा तब जाकर गतिरोध शांत हो सका। अधिवक्ताआें ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि बुधवार से तहसीलदार ठाकुर प्रसाद को तहसील परिसर में घुसने नहीं दिया जाएगा। इस मौके पर उपाध्यक्ष सुरेंद्र सिंह, महामंत्री संदीप सिंह, ज्ञानप्रकाश शुक्ल, अजय शुक्ल, दिनेश मिश्रा, अनिल तिवारी, हरिश्ंाकर द्विवेदी, आसिफ अली, प्रमोद तिवारी, अखिलेश द्विवेदी, सतीश उपाध्याय, प्रमोद सिंह, मनोज सिंह, रामलगन यादव, दीपेंद्र तिवारी, केबी सिंह, घनश्याम मिश्र, धनन्जय मिश्र, टीपी यादव आदि मौजूद रहे।