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माचिस जलाते ही आग का गोला बनी महिला

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शिवगढ़। बुधवार की रात सांस लेने में तकलीफ होने पर उठी महिला ने जैसे ही माचिस जलाया। वह पल भर में ही आग का गोला बन गई। उसकी चीख व आग की लपटें देख पति उसे बचाने दौड़ा। वह भी आग की चपेट में आ गया। तब तक बगल सो रहे दोनों बेटे भी आग के आगोश में आ गए। शोर शराबा सुनकर ग्रामीण पहुंचे और किसी तरह आग पर काबू पाया। इलाज के लिए इलाहाबाद ले जाते समय रास्ते में महिला ने दम तोड़ दिया। हादसा कुछ माह पहले उज्जवला योजना के तहत मिले गैस सिलेंडर के रिसाव से हुआ।
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पट्टी कोतवाली के उड़ैयाडीह सरोज बस्ती निवासी शिव कुमार सरोज (35) बुधवार की रात अपने परिवार के साथ खाना खाने के बाद सो गया। रात करीब 12 बजे अचानक शिवकुमार की पत्नी सुनीता (33) को सांस लेने में तकलीफ हुई। वह उठी तो पूरे कमरे मेें अजीब गंध फैला हुआ था। वह हकीकत जानने के लिए गैस सिलेंडर वाले स्थान पर पहुंचीं। उसने जैसे ही माचिस जलाया। वह आग का गोला बन गई। पूरे कमरे में आग फैल गई। पत्नी की चीख सुन पति की आंख खुल गई। वह आग बुझाने के लिए दौड़ा और झुलस गया। वह अपनी परवाह किए बिना सो रहे बेटे कृष्णा (7) व कुंदन (5) को उठाया। तब तक बेटे भी आग की चपेट में आ चुके थे। दरवाजा खोलकर बेटों को बाहर किया और पत्नी की आग बुझाने लगा। तब तक गांव के लोग आ गए थे। लोगों ने किसी तरह सुनीता की आग बुझाई। इसके बाद सभी को उपचार के लिए लेकर पट्टी अस्पताल गए। वहां सुनीता की हालत नाजुक देख डाक्टरों ने उसे जिला अस्पताल भेज दिया। यहां भी उसकी तबियत गंभीर देख डाक्टर ने तत्काल इलाहाबाद के लिए रेफर कर दिया। इलाहाबाद ले जाने के दौरान रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। यह खबर घर पहुंचीं तो पति व बच्चे रोने बिलखने लगे। शव पहुंचते ही घर पर कोहराम मच गया। शिवकुमार ने बताया कि कुछ माह उसकी प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत उसे गैस सिलेंडर व चूल्हा मिला था। रात में गैस रिसाव के कारण हादसा हो गया और वह अपनी बीवी से सदा के लिए हाथ धो बैठा। एसडीएम के आदेश पर पहुंचे राजस्व विभाग की टीम ने पीड़ित परिवार के खाने पीने का प्रबंध कराया।
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आग से जल गई गृहस्थी
उड़ैयाडीह सरोज बस्ती में शिवकुमार सरोज के घर लगी आग ने पूरी गृहस्थी को जलाकर राख कर दिया। खाने पीने की सामग्री के साथ ही बिस्तर भी जल गया था। गांव के लोगों ने पीड़ित परिवार की मदद को हाथ आगे बढ़ाया।
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उज्जवला योजना में बांटी गई घटिया सामग्री
उड़ैयाडीह में गुुरुवार की सुबह हादसे की खबर मिलने के बाद भारी भीड़ जमा हो गई। हर कोई हादसे पर दुख जता रहा था। इस ग्रामीणों का आरोप था कि गरीबों को निशुल्क मिलने वाला गैस सिलेंडर व चूल्हा घटिया वितरित किया गया था। चूंकि मुफ्त में मिलने के कारण सबकुछ जानते हुए भी विरोध का साहस नहीं कर सके।
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जानकारी के बाद भी नहीं आए कंपनी के कर्मचारी
उड़ैयाडीह में प्रधानमंत्री की उज्जवला योजना के तहत शिव कुमार सरोज को पट्टी स्थित इंडेन गैस एजेंसी से गैस सिलेंडर व चूल्हा मिला था। इस हादसे की जानकारी लोगों ने गैस एजेंसी के प्रबंधक को दी। सूचना के बाद भी हकीकत देखने के लिए कोई कर्मचारी घटनास्थल पर नहीं पहुंचा। केवल लोगों से फोन पर ही कंपनी के जिम्मेदारों ने बातचीत की। गैस सिलेंडर से होने वाले हादसे से पीड़ित परिवार को कंपनी की ओर से आर्थिक मदद भी मिलती है। इस बारे में ग्रामीण कंपनी के लोगों से संपर्क करते रहे।
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जिसे पाकर मिली खुशियां, वही बना मौत का सबब
प्रधानमंत्री उज्जवला योजना के तहत करीब एक साल पहले सुनीता को गैस सिलेंडर व चूल्हा मिला। जिससे उसे लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने से मुक्ति मिल गई। पहले दिन गैस सिलेंडर का प्रयोग कर चूल्हे पर खाना बनाने वाली सुनीता के चेहरे पर खुशियां थीं। वही खुशी आज सुनीता के लिए मौत का सबब बन गया। पति शिवकुमार का रो-रोकर बुरा हाल था।
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