बेल्हा में 205 बच्चे एचआईवी की चपेट में
ज्यादातर बच्चों को मां-बाप से मिली बीमारी, एआरटी सेंटर में चल रहा इलाज
2011 से 2018 के बीच 126 बालक और 79 बालिकाएं एचआईवी पीड़ित मिलीं
अमर उजाला ब्यूरो
प्रतापगढ़। यह खबर थोड़ा परेशान करने वाली है। जिले में 205 बच्चे एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में हैं। ज्यादातर बच्चों को यह बीमारी उनके माता-पिता से ही मिली है। वर्ष 2011 से 2018 के बीच 126 बालक और 79 बालिकाएं एचआईवी पीड़ित मिली हैं। एआरटी सेंटर पर इनका इलाज चल रहा है।
जिला अस्पताल स्थित एआरटी सेंटर में 2011 से अब तक 2717 लोगों को इलाज के लिए पंजीकृत किया गया है। इनमें 1211 पुरुष, 1301 महिलाएं और 205 बच्चे हैं। इन बच्चों को यह बीमारी उनके मां-बाप से मिली। अब उनका इलाज किया जा रहा है। पहले इन बच्चों के मां-बाप का इलाज एआरटी सेंटर पर चल रहा था। बच्चों की तबियत बिगडने के बाद जब उनकी जांच कराई गई तो उनके भी एचआईवी पीड़ित होने का खुलासा हुआ। एचआईवी पीड़ितों के लिए काम करने वाली पीएनपी संस्था इन बच्चों की देखभाल कर रही है।
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12 बच्चे हो गए हैं अनाथ
एचआईवी पीड़ित 12 बच्चे ऐसे हैं जिनके बचपन में ही सिर से मां-बाप का साया छिन गया। एचआईवी से पीड़ित होने के कारण उनकी मौत हो गई। इन बच्चों की देखरेख करने वाला अब उनके परिवार में कोई नहीं है। स्वास्थ्य विभाग जहां उनका मुफ्त में इलाज कर रहा है तो वहीं पीएनपी संस्था इनके रहने और खाने का प्रबंध करती है। सभी बच्चे स्वस्थ हैं और स्कूल भी जाते हैं।
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माता-पिता की मौत के बाद एचआईवी पीड़ित भाई-बहन को ठुकराया
एचआईवी पीड़ित बच्चों में सगे भाई-बहन भी हैं। उनके माता-पिता की मौत होने के बाद परिवार ने ही उन्हें ठुकरा दिया। चाचा-चाची और दादा ने उनसे मुंह फेर लिया। इसकी जानकारी होने पर पीएनपी संस्था के अध्यक्ष विनोद यादव ने दोनों बच्चो के रहने और खाने की व्यवस्था की।
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चिकित्सकों की लापरवाही से सात बच्चे आए एचआईवी की चपेट में
पीएनपी संस्था के अध्यक्ष विनोद यादव ने बताया कि सात बच्चे ऐसे हैं जिन्हें एचआईवी है। उनके माता-पिता को यह बीमारी नहीं है। पूछताछ के दौरान यह बात सामने आई कि चिकित्सकों की लापरवाही के चलते यह बच्चे एचआईवी की चपेट में आए। आपरेशन के दौरान चिकित्सकों की लापरवाही से उनकी जिंदगी नर्क बन गई।