मनरेगा के घपले की जांच के पहले क्षेत्र पंचायत के विकास कार्यों पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी गई है। अभिलेखों का परीक्षण होने के बाद स्थलीय जांच होगी, जिसमें मलाई काट रहे कई कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।
बीते 10 अगस्त को डीएम और सीडीओ के औचक निरीक्षण में मनरेगा में 20 करोड़ रुपये के घपले का खुलासा हुआ है। क्षेत्र पंचायत के तहत हुए विकास में प्रथम दृष्टया गड़बड़ी मिलने पर डीएम ने सहायक लेखाकार सुरेश कुमार को निलंबित कर बीडीओ के खिलाफ सीडीओ को जांच करने का आदेश दिया था। क्षेत्र पंचायत के तहत इतने कम समय में अधिक कार्य कराने वाले बीडीओ ने बगैर डीएम की अनुमति लिए ही विकास कार्य कराना प्रारंभ कर दिया था। जबकि, गाइडलाइन में स्पष्ट है कि क्षेत्र पंचायत बगैर डीएम की अनुमति के कोई भी कार्य नहीं कराएगा। मगर, कमीशन के खेल में बीडीओ, एपीओ, तकनीकी सहायक व अवर अभियंता ने मिलकर ऐसा खेल किया कि अधिकारी भी दंग रह गए।
sअफसरों की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि बगैर फाइल तैयार हुए ही भुगतान प्राप्त कर लिया गया है। मामले की जांच कर रहे जिला विकास अधिकारी रमाकांत तिवारी ने बताया कि क्षेत्र पंचायत के विकास कार्य पर अग्रिम आदेश तक रोक लगा दी गई है। बताया कि बीडीओ ने बगैर डीएम की अनुमति लिए विकास कार्य कराया। इसके अलावा अनियमितता के घेरे में एपीओ श्रीकृष्ण मिश्रा,अवर अभियंता अनिल अग्रवाल, तकनीकी सहायक भी हैं। उन्होंने बताया कि अभिलेखों की जांच होने के बाद एक-एक कार्य की स्थलीय जांच होगी।