अफसरों की मिलीभगत से दिव्यांग बच्चों को घटिया भोजन परोसने वाले ठेकेदार ने मंगलवार को फोन कर जिला समन्वयक को जान से मारने की धमकी दी। ठेकेदार ने चेताया कि बच्चों की संख्या में अगर कटौती की गई तो रिपोर्ट देने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इधर, मंगलवार को बच्चों को नाश्ता नहीं दिया, बल्कि सिर्फ चाय दी गई, इससे भूख से तड़प रहे बच्चे पानी पी-पीकर भूख मिटाते रहे।
बेसिक शिक्षा विभाग के सर्वशिक्षा अभियान के तहत शहर में दो दिव्यांग शिविर चल रहे हैं। प्राइमरी स्कूल शुकुलपुर और पूर्व माध्यमिक विद्यालय पुलिस लाइन में मिल रही आवासीय शिक्षा में बच्चों को घटिया नाश्ता और खाना देने का खुलासा सोमवार को अमर उजाला ने प्राथमिकता से की थी। 46 रुपये प्रति बच्चा प्रतिदिन नाश्ता खाने की दर से ठेकेदार को भुगतान किया जाता है। इसके बाद भी घटिया खाना परोसा जा रहा है। अखबार में खबर छपने के बाद जिला समन्वयक शालिनी शुक्ला ने सोमवार को दोनों आवासीय स्कूलों का निरीक्षण कर अखबार की खबर पूरी तरह सत्य बताते हुए उपस्थित बच्चों की अनुपात में ही ठेकेदार को भुगतान करने की रिपोर्ट दी। इसकी खबर जब संबंधित ठेकेदार को लगी तो, वह जिला समन्वयक पर बिफर पड़ा।
जिला समन्वयक को अरदब में लेते हुए चेताया कि जीवन अगर प्यारा है, तो मेरे भुगतान में कटौती की रिपोर्ट वापस ले लो। नहीं तो ठीक नहीं होगा।
इधर मंगलवार को ठेकेदार ने मनमानी करते हुए बच्चों को नाश्ता ही नहीं दिया, जिला समन्वयक ने बताया कि बच्चों को सिर्फ चाय दी गई, इससे भूख से परेशान बच्चे दोपहर तक कराहते रहे। दोपहर करीब एक बजे खाना मिलने पर बच्चों ने राहत महसूस की। प्रभारी बीएसए ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ने बताया कि वह इलाहाबाद मीटिंग में व्यस्त हैं, बुधवार को स्वयं जांच कर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। जिला समन्वयक, बीएसए कार्यालय शालिनी शुक्ला का कहना है कि प्रभारी बीएसए के निर्देश पर मैं दिव्यांग केंद्र का निरीक्षण करने गई थी। आख्या रिपोर्ट कार्यालय में देने पर ठेकेदार ने फोन पर धमकाया। कहा कि अगर कटौती की तो परिणाम भुगतने को तैयार रहना।