बांबे हाईकोर्ट के एक फैसले से वकील सेवाकर के दायरे में आ सकते हैं। कोर्ट ने चार्टर्ड एकाउंटेंट से तुलना करते हुए वकीलों की याचिका खारिज कर दी है। उसमें वकीलों ने कहा था कि वे कोर्ट और गरीबों की मदद करते हैं। सेवाकर लागू होने से वादकारियों पर बोझ बढ़ जाएगा।
बांबे हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर बोर्ड ने वकीलों पर सेवाकर लगाने की तैयारी शुरू कर दी है। यह जानकारी होने के बाद पश्चिमी भारत के वकीलों ने संयुक्त रूप से बांबे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दलील दी कि वे लोग सलाह के जरिए गरीबों और कोर्ट की मदद करते हैं। उन पर अगर सेवाकर लागू किया गया तो वादकारियों पर बोझ बढ़ जाएगा और बहुत से लोग न्याय से वंचित हो जाएंगे। इसलिए उन्हें सेवाकर के दायरे में लाया जाना उचित नहीं है। उन्होंने इसे संविधान का उल्लंघन बताते हुए तर्क दिया था कि इसका सीधा असर गरीब जनता पर पडे़गा। बांबे हाईकोर्ट ने वकीलों की इस दलील को खारिज करते हुए कहा है कि चार्टर्ड एकाउंटेंट, ऑर्किटेक्ट आदि भी सलाह देने का कार्य करते हैं। जब वे सेवाकर के दायरे में आ सकते हैं तो वकीलों को इससे अलग नहीं रखा जा सकता। चार्टर्ड एकाउंटेट जैसे फीस लेकर लोगों को सलाह देते हैं ठीक उसी तरह वकील भी फीस लेकर सलाह और न्याय दिलाते हैं। इसलिए वकीलों को सेवाकर के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता है। इस फैसले के बाद से वकीलों में हड़कंप है।