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खामियों से गरीबों के हक पर पड़ेगा डाका

Sat, 14 May 2016 11:43 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो प्रतापगढ़
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गरीबों के आशियाने का सपना साकार करने में सरकारी मशीनरी ही रोड़ा डाल रही है। आर्थिक सर्वे रिपोर्ट जिसके आधार पर गांव के गरीबों को आवास व अन्य जरूरी सुविधाएं मिलती हैं। उसमें भारी खामी है। प्रकाशित सूची से कई ग्राम पंचायतों के नाम गायब हैं। यही नहीं कई राजस्व गांव भी नदारद हैं। हैरत की बात यह है कि पात्रों के नाम गायब हैं और अपात्रों के नाम कई बार सूची में दर्शाए गए हैं। वर्ष 2002 की बीपीएल सूची जिसे आर्थिक जनगणना का प्रमुख आधार माना गया और उसके आधार पर ही गांव में आवासों की पात्रता सूची व आवासों का आवंटन अभी तक होता रहा। सरकार ने माना कि इतना लंबा समय गुजर जाने के बाद पुन: सर्वे कराया जाए। जिससे गरीबों को सुविधा बेहतर तरीके से मिल सके। लगभग 14 साल बीत जाने के बाद हुए सर्वे से गरीबों के मन में यह आस जगी कि अब उन्हें भी आवास व अन्य सुविधाएं मिल सकेंगी, लेकिन योजना से जुड़े जिम्मेदार लोगों ने मनमाने व गैर जिम्मेदाराना तरीके से सर्वे कर इस पूरी प्रक्रिया का बंटाधार कर दिया। सूची में व्यापक खामी है।
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पात्रों के नाम गायब हैं। कई लोगों के नाम बार-बार और राजस्व गांव व कई ग्रामपंचायतों के नाम सूची से गायब होना पूरी प्रक्रिया पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है। बेलखरनाथ ब्लॉक की किठौली, उड़ैयाडीह, चौखड़ा ग्रामपंचायत का नाम प्रकाशित सूची से गायब है। इसके अलावा सिधारी पट्टी, इब्राहिमपुर, पुरुषोत्तमपुर, मनैतापुर, पूरेदुर्बन, पूरे पहाड़, मिश्रौली दुखियापुर सहित कई राजस्व गांवों के नाम सूची से गायब हैं। इन प्रकाशित सूचियों के आधार पर ग्रामपंचायतों से इंदिरा आवास के लाभार्थियों की पात्रता सूची तैयार करने का फरमान सुनाया गया है। अब ऐसी दशा में प्रशभन यह उठता है कि गलत व आधी अधूरी सूची में पात्रता सूची कैसे तैयार हो। तमाम ग्राम प्रधानों ने इसकी शिकायत ब्लाक के अधिकारियों से की है, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जबकि यह गंभीर विषय है। यह हाल अकेले बेलखरनाथ का नहीं कई ब्लॉकों का है। इंदिरा आवास की पात्रता सूची खामियों व गलतियों का पुलिंदा है। ग्राम प्रधानों ने जिलाधिकारी से इस महत्वपूर्ण समस्या के निदान की मांग की है।
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