खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए राजस्व गांवों को बांटी गई धनराशि को प्रधानों और ग्राम पंचायत अधिकारियों ने निकालकर बंदरबांट कर लिया है। इस बात का खुलासा अफसरों की जांच में हुआ है। इधर मुख्यमंत्री के स्वच्छता अभियान के प्राथमिता देने को लेकर जिले के अफसरों की नींद उड़ गई है। प्रधानों और ग्राम पंचायत अधिकारियों को नोटिस जारी कर अविलंब निर्माण कराने को कहा है।
जिले में शौचालय निर्माण के लिए अभी तक लगभग चालीस करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। मगर वास्तविक रुप से एक भी गांव ओडीएफ नहीं हुए हैं। हालांकि जिला पंचायत राज विभाग का दावा है कि जिले के 224 गांव अब तक ओडीएफ घोषित हो चुके हैं। आदर्श आचार संहिता लागू होने के पहले ग्राम पंचायतों को रेवड़ी की तरह बांटी गई धनराशि का उपभोग हुआ या नहीं। इसकी जांच के लिए डीएम डॉ. आदर्श सिंह ने जनपद स्तरीय अफसरों की टीम गठित कर मामले की जांच कराई। जांच में खुलासा हुआ कि अधिकांश गांवों में धनराशि तो निकाल ली गई है, मगर अभी तक निर्माण नहीं किया गया है। कई गांवों मेें ऐेसे भी मामले प्रकाश में आएं हैं कि शौचालय की धनराशि लाभार्थी को देने के बजाय ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी स्वयं बनवा रहे हैं। डीपीआरओ कुंवर सिंह यादव ने बताया कि जिस गांव में अभी तक शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है। उन्हें नोटिस जारी कर अविलंब तैयार करने की हिदायत दी जा रही है।