कोरोना संक्रमण से प्रभावित घनी आबादी वाली गलियों में आंशिक कर्फ्यू भी बेअसर है। इलाके के कई घनी आबादी वाले मोहल्लों में बीमारी से बेपरवाह लोगों की भीड़ जुटती है। जिससे वह खुद और दूसरों की जिंदगी को खतरे में डाल रहे हैं। पुलिस के पहुंचने पर लोग भागने लगते हैं।
कोरोना के तीन संक्रमित लोगों के मिलने के बाद जिला प्रशासन के हाथ पैर फूल गए थे। शहर के कई हिस्सों के साथ ही नरसिंहगढ़ और देल्हूपुर में आंशिक कर्फ्यू लगा दिया है। ताकि न तो लोग बाहर निकल सके और न ही बाहर से कोई गांव में आ सके। पुलिस बराबर लोगों की निगरानी कर रही है।
शहर के सिप्तैन रोड, धर्मशाला वार्ड, तहसील वार्ड, बेगमवार्ड, घोसियाना वार्ड व भैरोपुर वार्ड को पूरी तरह से प्रशासन ने सील कर दिया है। डोर टू डोर स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच करने के साथ ही मकानों को सेनेटराइज किया जा रहा है। लोगों को अपने घरों में रहने के लिए बार-बार सुझाव दिए जा रहे हैं।
इसके बावजूद लोग मनमानी कर रहे हैं। कोरोना के संक्रमण से खुद की जिंदगी तो खतरे में डाल ही रहे हैं। दूसरों की जिंदगी पर भी उनकी करतूतों से खतरा मंडरा रहा है। पुलिस मोहल्लों में गश्त कर लोगों को घरों में रहने के लिए लगातार हिदायत दे रही है। पुलिस के आने की आहट मिलने पर लोग भागकर घरों में छिप जाते हैं।
जैसे ही पुलिस कुछ दूर जाती है लोगों की भीड़ फिर से एकत्र होकर मनमानी करने लगती है। ऐसा करने वाले लोग अपनी व अपने परिवार की जिंदगी खुद खतरे में डाल रहे हैं। धर्मशाला व तहसील वार्ड में इतनी मनमानी नहीं दिख रही है। जितनी मनमानी बेगमवार्ड, घोसियाना और भैरोपुर में दिख रही है।
खरीदारी करते भी बरतें सावधानी
मोहल्लों में ठेले वालों को सब्जी, राशन व फल बेचने के लिए प्रशासन ने अनुमति दे रखी है। अनुमति लेकर मोहल्लों में सामान बेचने पहुंचे दुकानदार से ग्राहकों को दूरी बनाकर रखनी चाहिए।
कोशिश करनी चाहिए कि दुकानदार जो सामान दे रहा है उसे किसी टोकरी में लें। घर के भीतर ले जाते ही पहले उसे गर्म पानी से धोएं। इसके बाद ही इसका उपयोग करें। देखने में इसके विपरीत नजारा दिखाई दे रहा है। लोग सामान खरीदने के दौरान भीड़ लगा लेते हैं।
शाम को बुजुर्ग भी बैठकबाजी में हो जाते हैं शामिल
लाकडाउन के साथ ही आंशिक कर्फ्यू का पालन अधिकांश मोहल्लों में ही दिख रहा है। शाम को आसपास के बुजुर्ग भी बैठकबाजी करने के लिए कुर्सी लगाकर गलियों व सड़कों के किनारे बैठ जाते हैं। जबकि उन लोगों को अधिक जरूरत होती है कि वे अपने घरों के भीतर रहें। परिवार के लोगों को भी घर के भीतर रहने व जरूरी काम होने पर ही घर से बाहर निकलने के लिए प्रेरित करें।