जिले में बिहार और छत्तीसगढ़ के 5632 मजदूर फंसे हुए हैं। इनमें अधिकांश मजदूर ईंट-भट्ठा, सड़क निर्माण और राजकीय भवनों का निर्माण करने आए हैं। इनमें अधिकांश मजदूरों को 25 अप्रैल से रोजगार मिल गया है, जबकि सड़क निर्माण में लगे श्रमिक अभी भी बेरोजगार हैं। मेडिकल कालेज के निर्माण में लगे लगभग 157 मजदूरों को अभी रोजगार नहीं मिला है।
लॉकडाउन में बेल्हा के लोग ही बाहर नहीं फंसे हैं, बल्कि बिहार और छत्तीसगढ़ के मजदूर जिले में भी फंसे हुए हैं। 25 मार्च से हुए लॉकडाउन के चलते यह मजदूर अपने घर नहीं पहुंच पाए हैं। इससे यह जिले में रह रहे हैं। इसमें अधिकांश मजदूर ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले हैं।
शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने तहसीलों से मजदूरों से जो संख्या जुटाई है, वह राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने दी है। जिले में 5632 मजदूर ऐसे हैं, जो जिले में रोजगार की तलाश में आए हुए थे, मगर लॉकडाउन के चलते बेरोजगार हो गए हैं।
मेडिकल कालेज का निर्माण करने आए लगभग 250 मजदूरों में लगभग 157 अभी भी बेरोजगार हैं, जबकि एक ठेकेदार के कार्य प्रारंभ करने से कुछ मजदूरों ने राहत की सांस ली है। ईंट-भट्ठे पर कार्य करने वाले मजदूरों को राहत है, क्योंकि अधिकांश ईंट-भट्ठों पर इन दिनों कच्ची ईंट तैयार की जा रही है।
शिवसत में निर्माणाधीन आईटीआई, अस्पताल का निर्माण भी पूरी तरह ठप है। सड़क निर्माण का कार्य प्रारंभ नहीं होने से अब मजदूर घर जाने की तरकीब सोच रहे हैं, मगर उन्हें सफलता नहीं मिल रही है।
जिले में जो मजदूर रुके हुए हैं, उनमें अधिकांश काम करने वाले हैं। अगर वह घर जाने की इच्छा जताते हैं तो इसकी सूचना शासन को मुहैया कराई जाएगी। फिलहाल निर्माण कार्य प्रारंभ होने से इन लोगों को रोजगार मिल गया है।
शत्रोहन वैश्य, एडीएम