देशभर में भले ही तेजी से फैल रहे कोरोना वायरस से बचाव के लिए तरह-तरह के इंतजाम किए जा रहे हैं, लेकिन जिले में स्वास्थ्य विभाग इससे पूरी तरह बेपरवाह बना है।
जिले में न तो लोगों इस वायरस से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है और न ही स्वास्थ्य विभाग इसे लेकर जरा भी संजीदा है। शासन के निर्देश पर खानापूर्ति के लिए एक वार्ड बना दिया गया है। हालत यह है कि सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारियों और डाक्टरों के पास भी मास्क नहीं है। सीएमओ इसके लिए बीमारी फैलने का इंतजार कर रहे हैं।
देश में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। दिल्ली, आगरा के बाद अब लखनऊ में दो लोगों में कोरोना की पुष्टि हुई है। इसके चलते योगी सरकार ने प्राथमिक से इंटर तक के सभी विद्यालयों में 22 मार्च तक अवकाश घोषित कर दिया है। मगर स्वास्थ्य विभाग को कोरोना से कोई लेना-देना नहीं है।
यही कारण है कि चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी कोरोना से बचाव के लिए मास्क नहीं दिया जा रहा है। जबकि डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मचारी मरीजों के बीच ही रहते हैं। इतना ही नहीं पोस्टमार्टम में ड्यूटी करने वाले डॉक्टर और कर्मचारी बगैर मॉस्क के ही शव विच्छेदन कर रहे हैं। इससे वह परेशान हैं।
पोस्टमार्टम के दौरान बगैर मॉस्क के दस मिनट भी अंदर रुक पाना मुश्किल हो जाता है। इस बारे में जब सीएमओ एके श्रीवास्तव से बात की गई तो उनका बयान चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि बिना बीमारी फैले क्यों मास्क वितरित किया जाए। एक करोड़ लोगों को हम ऐसे ही मास्क वितरित कर दें।
आप लोग बीमारी को लेकर हौव्वा खड़ा कर रहे हैं। इसके लिए न तो कोई गाइड लाइन है और न ही बजट। रही बात पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों की तो वहां की जिम्मेदारी एसपी की है। इस संबंध में आप उनसे बात करिए।
पूरे जिले में मॉस्क की किल्लत
जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में मॉस्क नहीं है। बगैर मॉस्क के चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को मरीजों के बीच में बैठना पड़ रहा है। जबकि शासन ने यह भी आदेश दिया है कि जिन मरीजों को खांसी और जुकाम या फिर बुखार हो रहा हेै उनसे बच कर रहें। हाथ न मिलाएं, मास्क का प्रयोग करें।
कोरोना से पीड़ित होने की अफवाह से डॉक्टर परेशान
जेठवारा के कटरा गुलाब सिंह निवासी एक डाक्टर का बेटा चीन के युवान में मेडिकल की पढ़ाई करता है। 17 जनवरी को वह घर लौट आया था। शुक्रवार को क्षेत्रीय लोगों ने उसे कोरोना से पीड़ित होने की अफवाह उड़ा दी। जबकि उसे कुछ भी नहीं हुआ था। बाद में घरवालों ने उसे लखनऊ भेज दिया।