गड़वारा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पूरबगांव का भवन करोड़ों रुपये से बना हुआ है, लेकिन दो साल से अस्पताल में एक भी डाक्टर नहीं है। लैब टेक्नीशियन के भरोसे अस्पताल चल रहा है। इससे आए दिन अस्पताल में हंगामा होता रहता है।
संडवा चंद्रिका विकास खंड की सीमा पर सई नदी के तट पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पूरबगांव बदहाली के दौर से गुजर रहा है। पीएचसी में दो वर्ष से डाक्टर की तैनाती नहीं हुई। इससे लोगों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल परिसर में झाड़िय़ां उगी हुई हैं। इससे मरीजों को अंदर जाने में डर लगता है। संडवा चंद्रिका के लगभग पचास हजार आबादी को ध्यान में रखकर बना स्वास्थ्य केंद्र वर्तमान में निरर्थक साबित हो रहा है। केंद्र में दो साल से न ही फार्मासिस्ट और न ही वार्ड ब्वाय की तैनाती हुई है। लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार गुप्ता की मानें तो डाक्टर के नहीं होने से वह स्वयं पर्चा बनाते हैं, मरीज देखते हैं, जांच करते हैं और मरीजों को दवाएं भी बांटते हैं।
प्रतिदिन औसतन डेढ़ सौ मरीज पीएचसी आते हैं। लेकिन डॉक्टर नहीं होने के कारण अधिकांश मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। वहीं वर्ष 2009 में तैयार होने वाली बिल्डिंग देखरेख नहीं होने से जर्जर होती जा रही है। दरवाजे और खिड़कियों में दीमक लग गए हैं। दीवारों पर दरारें पड़ गई हैं। अधीक्षक सीएचसी, संडवाचंद्रिका मनीष मौर्य का कहना है कि पीएचसी में कर्मचारियों की कमी है, जनता की शिकायतें बराबर आ रही हैं। सीएमओ से जल्द डॉक्टर की तैनाती के लिए पत्र भेजा गया है। डॉक्टर के अभाव में एलटी अस्पताल की देखभाल कर रहा है। सीएमओ डॉ. राजकुमार अय्यर का कहना है कि जिले में डाक्टरों की भारी कमी है। शासन को रिपोर्ट भेजी गई है। जल्द ही डॉक्टर, फार्मासिस्ट और वार्ड ब्वाय की तैनाती की जाएगी।