जिला प्रशासन एक तरफ जहां लोगों को खुले में शौच जाने से रोकने के साथ ही गांवों को ओडीएफ घोषित करने के लिए पूरी ताकत झोंके हुए है, वहीं खुद उसके अपने नुमाइंदे ही खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं। कंपनी बाग के पीछे बनी कर्मचारी कालोनी में शौचालयों के सेफ्टी टैंक भरने के साथ ही टूट गए हैं। इससे कर्मचारी और उनके परिवार भारी मुसीबत में हैं। शौच के लिए बाहर जाना उनकी मजबूरी बन गई है। गांवों को खुले में शौच से मुक्त बनाने के लिए भोर में ही पहुंचकर सीटी बजाने वाले अफसरों को अपने कर्मचारियों की यह दुर्दशा दिखाई नहीं दे रही है। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी उन्हें राहत नहीं मिल पा रही है।
कंपनी बाग के पीछे दहिलामऊ उत्तरी वार्ड में मेहता पार्क कर्मचारी कॉलोनी बनी हुई है। इन दिनों कॉलोनी पूरी तरह से जर्जर हो गई है। उसमें लगे गेट भी टूट चुके हैं। कुछ लोगों के शौचालय का सेफ्टी टैंक टूट गया है तो कुछ का भर गया है। इससे लोग खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। सफाईकर्मी के न आने से नालियों की सफाई नहीं हो पा रही है। गंदगी और जलजमाव होने से नालियां बजबजा रही हैं। हर समय संक्रामक बीमारी पैदा होने का डर बना रहता है। कॉलोनी में रहने वाली रंजना सोनी पत्नी विजय ने बताया कि विभाग उसके वेतन से हाऊस चार्ज भी काटता है। इसके बाद भी समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जबकि कई बार इसकी शिकायत जेई अशोक गुप्ता से की गई। वे इस समस्या की ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। डीएम से शिकायत की गई तो उन्होंने जेई को कॉलोनी की समस्यां को दूर करने के लिए आदेश भी दिया था, मगर जेई किसी की बात सुनने को तैयार नहीं है।
कर्मचारी कालोनी के लोगों की समस्या जल्द दूर कराई जाएगी। जांच कराकर लापरवाह लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
आदर्श सिंह, डीएम।