पावन मास में करमाही के सुरम्य स्थल पर ऐसा लग रहा है, जैसे यहां शुक तीर्थ स्थापित कर दिया हो। हमारा सौभाग्य है कि शुक तीर्थ के पुर्नोद्धार का मौका हमारी सरकार में हमें मिला। शुक तीर्थ से गंगा की धारा कई किमी दूर जा चुकी थी लेकिन उस समय शुक तीर्थ में गंगा की धारा को वहां दोबारा लाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
बताया कि हमारे यहां जो युगों की कल्पना की गई है उसके अनुसार तीसरे युग द्वापर में श्रीमद्भागवत कथा की कल्पना की गई। इसके बाद चौथे युग कलयुग में इसकी शुरुआत हुई। पांच हजार साल से कथा के श्रवण का साैभाग्य प्राप्त हो रहा है। कोटि-कोटि धर्मावलंबी इससे अपनी मुक्ति का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। इससे पहले भी धर्म संस्कृति थी, जिसका प्रमाण हमें आज भी प्रस्तुत करना पड़ता है। इसके पीछे कई कारण हैं, हमें इस पर चिंतन करने की आवश्यकता है।
सनातन धर्म सशक्त है तो विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। कथा व्यास हमेशा धर्म की जय बोलते हैं। उसके साथ ही विश्व कल्याण, प्राणियों में सद्भावना की बात करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा भगवान की पावन कथा है। आप सभी कथा के मूल तत्वों को समझकर जन-जन तक पहुंचाएंगे। जब इंसान जन्म लेता है तो साथ में कुछ ऋण भी लेकर पैदा होता है। सभी ऋणों से मुक्ति का माध्यम यह कथा है।