विभागों में लंबे समय से जमे बाबू अब कामचोरी नहीं कर पाएंगे। विभाग को अपने इशारे पर नचाने वाले इन लिपिकों पर शिकंजा कसने के लिए जल्द ही ई-फाइलिंग प्रणाली लागू होने जा रही है। लिपिकों को जबाबदेह बनाने के लिए अब विभाग की सभी गतिविधियों को कंप्यूटर में ही फीड करना होगा, अधिकारी कंप्यूटर पर ही जांच करेंगे और डिजिटल हस्ताक्षर बनाकर स्वीकृति प्रदान करेंगे।
जिले के सरकारी कार्यालयों में अब लिपिकों का सिक्का नहीं चल पाएगा। किसी भी कार्य के लिए आम लोगों को परेशान करना, सुविधा शुल्क की वसूली करना और लंबे समय तक काम को लंबित रखने का खेल अब नहीं कर सकेंगे। सूबे में जल्द ही ई-फाइलिंग प्रणाली लागू होने जा रही है। इस प्रणाली के तहत कार्यालय में न तो कोई फाइल होगी और न ही कोई रजिस्टर। बल्कि सभी लिपिकों को विभागीय कार्य कंप्यूटर पर ही करना होगा। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के डिजिटल हस्ताक्षर होंगे। कंप्यूटर पर आदेश, निर्देश जारी कर अधिकारी को फारवर्ड करेंगे। अधिकारी और कर्मचारी विभागीय पोर्टल पर पासवर्ड लॉगिन करके हस्ताक्षर करेंगे।
विभाग में आने वाली शिकायतों, विकास योजनाओं और लाभार्थियों की जानकारी घर बैठे ही लोगों को जानकारी हो जाएगी। अगर कोई कर्मचारी सूचना देने में देरी करता है, तो कंप्यूटर उनका झूठ पकड़ लेगा। कंप्यूटर की टाइमिंग भी यह बताएंगी कि लिपिक ने कितने घंटे कार्यालय में काम किया है।
दस जुलाई से प्रारंभ होगी ट्रेनिंग
कर्मचारियों को ई-फाइलिंग प्रणाली की जानकारी देने के लिए पहले चरण का प्रशिक्षण 10 जुलाई से दिया जाएगा। तीन चरणों में मिलने वाले प्रशिक्षण में कर्मचारियों को कंप्यूटर चलाना और उसकी बारीकियों से अवगत कराया जाएगा।