स्टेशनों कोे साफ-सुथरा रखने में रेलवे का प्रयास कुछ जगहों पर सफल नहीं हो रहा है तो कहीं न कहीं इसके जिम्मेदार मुसाफिर भी हैं। जहां मौका देखते हैं पीक मारने से गुरेज नहीं करते । जागरूकता और सफाई के तमाम अभियान के बावजूद लोगों के पान की पीक से यहां की दीवारें लाल हो रही हैं। इस संबंध में रेलवे की मानें तो प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन पर डेली करीब छह हजार लोग आते-जाते हैं। इसमें से करीब बीस प्रतिशत लोग स्टेशन को गंदा करते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वच्छता पर फोकस किया। सबसे पहले रेलवे ने अभियान को अंगीकार किया। स्टेशनों पर तमाम तरह के जागरूकता अभियान चले। वाणिज्य विभाग ने अभियान को धार देने के लिये स्टेशनों पर टास्क फोर्स गठित कर दी। जो बीच-बीच में सफाई अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करे। सांसद, मंत्री खुद झाड़ू लेकर निकल आये। मगर अफसोस तमाम अभियान और नारों के बाद भी स्टेशनों की उम्मीद से कम ही सफाई हो पा रही है। उसी कमतर सफाई की एक झलक प्रतापगढ़ में देखने को मिल रही है।
डेली 6 हजार लोगों का स्टेशन आते हैं
रेलवे के आंकड़ाें पर नजर डाले तो डेली छह हजार लोग प्रतापगढ़ रेलवे स्टेशन आते-जाते हैं। इसमें से करीब पांच हजार तो मुसाफिर हैं। बाकी उनको लेने और छोड़ने वाले। इसमें सभी नहीं करीब बीस प्रतिशत ऐसे लोग हैं जो रेलवे परिसर में थूकते हैं।
नहीं है थूकदान, अभियान भी ढीला
रेलवे स्टेशन पर फैली गंदगी की दूसरी वजह प्लेटफार्म पर पर्याप्त संख्या में थूकदान न होना है। सफाई अभियान का ढीलापन भी गंदगी के लिए कहीं न कहीं जिम्मेदार है। अधिकारी कहते हैं थूकदान लगाने के बावजूद यात्री इधर-उधर थूकते हैं। सफाई के लिए कर्मचारियों का भी अभाव है।
अंकुश लगाने के लिए नहीं की जा रही कार्रवाई
प्लेटफार्म और परिसर में ध्रूमपान करने वालों के खिलाफ वाणिज्य विभाग द्वारा गठित की गई टास्क फोर्स भी सुस्त पड़ गई है। आंकड़े बताते हैं कि रोज नहीं मगर महीने भर में पांच दस लोग कार्रवाई की जद में आ जाते हैं। गंदगी फैला रहे लोगों पर अंकुश लगाने के लिये ठोस कदम न उठाये जाने से लोग बिंदास गंदगी फैला रहे हैं। जबकि टास्क फोर्स में एसएस, सीआईटी, जीआरपी और आरपीएफ को रखा गया है।