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छह साल से खेत की मेड़ से होकर विद्यालय पहुंचते हैं बच्चे

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कुंडा के रहवई स्थित प्राथमिक विद्यालय पनाहनगर से छुट्टी होने के बाद मेड़ों से होकर जाते बच्चे व श - फोटो : PRATAPGARH
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छह साल पूर्व बना विद्यालय अब तक किसी मार्ग से जुड़ नहीं पाया है। इसमें पढ़ने आने वाले बच्चों और पढ़ाने आने वाले शिक्षकों को खेतों की मेड़ों से होकर आना पड़ता है। शायद अधिकारी भी इस विद्यालय में नहीं पहुंचे हैं क्योंकि बारिश में इस विद्यालय तक पहुंचना नामुमकिन होता है। रास्ते के अभाव के कारण ही गांव के बगल ही होने के बाद भी बच्चों की संख्या इसमें काफी कम होती है।
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विकास खंड कुंडा के रहवई गांव में प्राथमिक विद्यालय पनाहनगर है। यह गांव के नजदीक ही लगभग 200 मीटर की दूरी पर है। इसके बाद भी इस विद्यालय तक पहुंचने के लिए बच्चों और शिक्षकों को खेतों की मेड़ों से होकर जाना पड़ता है। हालांकि गांव के दूसरी तरफ से मुख्य रास्ता है लेकिन किसी भी तरफ से इस विद्यालय को जोडने का प्रयास नहीं किया गया है। हालत यह है कि बरसात में बच्चे स्कूल ही नहीं जाते। खेतों में पानी भरा होने और खेतों में फसल बड़ी होने पर भी बच्चे स्कूल जाने से डरते हैं।
इसके अलावा गांव से सीधा जुड़ाव न होने के चलते नामांकन होने के बाद भी बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पाते। सहायक अध्यापिका ममता सिंह के अनुसार छह साल पहले यह विद्यालय पेड़ के नीचे चलता था। काफी लिखापढ़ी के बाद विद्यालय का निर्माण हो पाया लेकिन रास्ता आज तक नहीं बन पाया है। इसके चलते बच्चों को भारी दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
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ग्रामीणों का भी कहना है कि रास्ता बनना चाहिए। इसके लिए जरूरत पड़ी तो जमीन भी दी जाएगी। बच्चों की शिक्षा बाधित नहीं होनी चाहिए। गांव के नजदीक विद्यालय होने के बाद भी बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। वैसे विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुनील दत्त विश्वकर्मा भी अक्सर गायब ही रहते हैं।
आधी से कम रहती है उपस्थिति
कुंडा। प्राथमिक विद्यालय पनाहनगर में 71 बच्चे नामांकित हैं। इसके बाद भी इसमें बच्चों की उपस्थिति काफी कम रहती है। विद्यालय में 35-40 के रेशियों में बच्चों की उपस्थिति रहती है। गांव के लोग फसल ज्यादा बड़ी होने पर छोटे बच्चों को भेजना बंद कर देते हैं। उधर उनके खेतों की मेड़ों से फिसलकर गिरने की स्थिति रहती है। उधर बरसात ज्यादा हो जाने पर भी बच्चों को अभिभावक स्कूल जाने से मना कर देते हैं।
सुविधाओं के साथ ही नहीं मिलता फल और दूध
प्राथमिक विद्यालय पनाहनगर से होते हुए विद्युत तार गया है। खंभा भी विद्यालय परिसर के पास ही लगा है लेकिन विद्यालय में कनेक्शन नहीं है। इसके चलते विद्यालय में न तो पंखा चलता है और न ही लाइट जलती है। सिलेंडर होने के बाद भी चूल्हे पर खाना बनता है। अब तक बैग, ड्रेस और कुछ किताबें भी नहीं बंट पाई हैं। इसके साथ ही बच्चों को फल और दूध नहीं दिया जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यहां किसी भी अधिकारी के आने की ज्यादा संभावनाएं भी नहीं होती हैं।
रास्ते की समस्या है। नक्शे में शायद चकरोड न हो। इसके लिए ग्राम प्रधान से बात की जाएगी। विद्यालय के रास्ता बेहद जरूरी है। बाकी अन्य समस्याओं के लिए भी जांच की जाएगी।
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रतनलाल, खंड विकास अधिकारी, कुंडा।

कुंडा के रहवई स्थित प्राथमिक विद्यालय पनाहनगर से खेतों की मेड़ से होकर जाते बच्चे। - फोटो : PRATAPGARH

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