सीएचसी सांगीपुर में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। औसतन रोजाना तीन मरीजों की ओपीडी वाले सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं दो डॉक्टरों के कंधे पर है। रोजाना यहां करीब 15 मरीज भर्ती होते हैं। अधीक्षक और एक फिजिशियन के सहारे संचालित सीएचसी से हर दिन कई मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ता है। उन्हें अपने मर्ज के डॉक्टर नहीं मिल पाते हैं।
अधीक्षक डॉ. धर्मेंद्र शुक्ल ने बताया कि उन्हें मिलाकर दो डॉक्टर हैं। फिजिशियन के रूप में डॉ. आशीष गुप्ता तैनात हैं। सर्जन, नेत्र, ईएनटी, दंत, आर्थो और बाल रोग विशेषज्ञ के पद खाली हैं। मजबूरन आरबीएसके टीम के डॉक्टरों से ओपीडी चलाई जा रही है। यह सीएचसी दो जनपदों की सीमा पर है। इसलिए यहां मरीजों का दबाव ज्यादा है।
बताया गया कि सीएचसी में महिला डॉक्टर नहीं हैं। गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है। उन्हें लालगंज सीएचसी, अमेठी या मेडिकल कॉलेज जाना पड़ता है। एक्सरे सुविधा है पर फिल्म नहीं है। रिपोर्ट मोबाइल पर भेज दी जाती है। दंत विभाग में हमेशा ताला लटका रहता है। डॉक्टर नहीं होने के कारण मरीज निजी क्लीनिक में जाने को मजबूर हैं।
बोले लोग
आंख में समस्या है। सीएचसी आया था। यहां आंख के डॉक्टर ही नहीं हैं। अब निजी डॉक्टर या मुंशीगंज जा रहा हूं। - रामशरण वर्मा, पूरे बख्शी राजमतीपुर
दांत के दर्द के चलते तीन दिनों से सो नहीं पाया। सीएचसी में दिखाने आया तो देखा दंत विभाग में ताला लटका था। डॉक्टर नहीं होने के कारण वापस जाना पड़ रहा है। - भारत सिंह, भैयापुर दर्रा
वर्जन
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से दिक्कत है। स्टाफ कम है। आरबीएसके टीम के डॉक्टरों से सहयोग लिया जा रहा है। शासन को कई बार पत्र लिखा गया है। जल्द ही पद भरने की उम्मीद है। - डॉ. धर्मेंद्र शुक्ल, सीएचसी अधीक्षक सांगीपुर।
सांगीपुर सीएचसी में बंद डेंटल चिकित्सक कक्ष। संवाद
सांगीपुर सीएचसी में बंद डेंटल चिकित्सक कक्ष। संवाद
सांगीपुर सीएचसी में बंद डेंटल चिकित्सक कक्ष। संवाद