प्रतापगढ़। ग्रामीण उपभोक्ताओं को विद्युत बिल जमा करने के लिए सहूलियत के तौर पर शुरू की गई कैशवैन की सुविधा धड़ाम जिले में बेपटरी हो चुकी है। चालक बीट के अनुसार भ्रमण करने के बजाए मौज काट रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं को बिल जमा करने के लिए विद्युत उपकेंद्र व कार्यालयों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। मगर विभागीय अधिकारी इससे अंजान बने हुए है।
जिले में चार विद्युत वितरण पारेषण खंड है। रानीगंज, सदर, लालगंज व कुंडा। इसके तहत कुल छह लाख से अधिक पंजीकृत विद्युत उपभोक्ता है। जिले में 67 विद्युत उपकेंद्रों के जरिए आपूर्ति की जाती है। लगातार बिजली व्यवस्था में सुधार हो रहा है। बिजली बिल जमा करने के लिए विभाग ने विद्युत उपभोक्ताओं को आनलाइन जमा करने की सुविधा प्रदान की है। शहरी उपभोक्ता तो इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। मगर ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ताओं को आनलाइन बिल जमा करने में दिक्कत होती है। ग्रामीण इलाकों मेें उपभोक्ताओं की सहूलियत के लिए कैश वैन की सुविधा दी गई है। ताकि उन्हें कार्यालयों एवं उपकेंद्रों का चक्कर न लगाना पड़े। दो साल पहले रानीगंज, लालगंज, कुंडा व सदर सहित चारों विद्युत पारेषण खंड में दो-दो कैशवैन का संचालन हुआ।
शुरूआत में तो कैश वाहन रूटचार्ट के अनुसार भ्रमण की। उपभोक्ताओं को भी गांव व चौराहों पर बिल जमा करने से काफी सहूलियत मिली। मगर बाद में व्यवस्था बेपटरी हो गई। कैश वाहन संचालक अब वाहन लेकर मनमाने तरीके से भ्रमण कर रहे है। चौराहों व गांवों में कैश वैन नहीं दिख रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं को बिल जमा करने के लिए कतार मेें लगना पड़ रहा है। सर्वर की भी समस्या बनी हुई है। सर्वर फेल होने से लोगों को निराश होकर लौटना पड़ता है। एक्सईएन द्वितीय उमाकांत ने बताया कि कैश वैन के संचालन टेंडर प्रक्रिया के अनुसार होती है। समय सीमा समाप्त होने पर पुन: टेंडर की प्रक्रिया होती है। रही बात बिल जमा करने की तो विद्युत उपकेंद्र के परिक्षेत्र में जगह-जगह बिल जमा करने के लिए केंद्र भी खोले गए है। वहां जाकर उपभोक्ता बिल जमा कर सकते हैं।