29 साल बाद बेल्हा माइनर की खुदाई से रूपापुर और शिवजीपुरम के अवैध कब्जेदारों में हड़कंप मचा गया है। मंगलवार को सदर ब्लाक के बगल की नहर पर जेसीबी गरजते ही स्थानीय लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। नेताओं का फोन घन-घनाता रहा, मगर सिंचाई विभाग के अफसर नजरअंदाज कर मशीन को दौड़ाते रहे। मंगलवार को एक दर्जन से अधिक कब्जेदारों को बेदखल किया गया।
सिंचाई विभाग के बेल्हा माइनर पर रूपापुर और शिवजीपुरम के लगभग तीन सौ लोगों ने उसका अस्तित्व मिटाकर हवेली खड़ी कर ली है। नहर के मूल भाग पर सड़क बना दी गई है, तो पटरियों पर आलीशान भवन खड़े कर दिए गए हैं। जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग की संयुक्त कार्रवाई में कब्जा करने वालों को चिह्नित भी किया गया है, मगर अभी तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है। मंगलवार को सिंचाई विभाग के अफसर जेसीबी लेकर खुदाई करने पहुंचे तो अवैध कब्जेदारों के होश उड़ गए।
नेताओं के पास फोन घनघनाने के साथ ही अफसरों से भी पानी नहीं आने का हवाला देते हुए खुदाई बंद करने की मांग की। एसडीओ राजेंद्र पाल ने एक न सुनी। स्थानीय लोग चिल्लाते रहे और मशीन दौड़ती रही। लगभग एक किमी की सफाई में लगभग एक दर्जन से अधिक कब्जेदारों को बेदखल किया गया। नहर की पटरी पर घर बनाने वालों ने नहर को बंद करके सड़क बना दी थी, जिसे जेसीबी से उखाड़ दिया गया। हालांकि दोपहर में खुदाई का कार्य बंद कर दिया गया।
हनुमान मंदिर तक होनी है खुदाई
बेल्हा माइनर की सफाई के लिए किमी तीन से 7.400 किमी की सफाई के लिए दो लाख रुपये का टेंडर दिया गया है। विभाग का मानना है कि हनुमान मंदिर तक खुदाई होना ही है, इसमें किसी प्रकार का दबाव नहीं महसूस किया जाएगा।
सिंचाई विभाग की नहर पर जिन लोगों ने अवैध कब्जा किया है, उसकी कार्रवाई चल रही है। अभी हनुमान मंदिर तक नहर की सफाई होगी। जो अवैध कब्जेदार हैं, उन्हें बेदखल किया जा रहा है, अगर कोई आपत्ति करता है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
एसके पाल, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग