जिले में लगातार लूट, छिनैती, हत्या व फायरिंग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए पुलिस अफसर हर कदम उठा रहे हैं। व्यापारियों से मदद मांग दुकानों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगवाने की बात कही जा रही है। अपने बीमार पड़ी तीसरी आंख की अफसरों को सुध नहीं है। चौराहों पर लगे कैमरे तो दूर तहसील, कोतवाली और पुलिस चौकी पर लगे सीसीटीवी कैमरे भी काम नहीं कर रहे हैं।
जिले में लगातार बढ़ रहे अपराधों पर काबू पाने के लिए शहर से लेकर ग्रामीण अंचलोें की बाजारों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए पुलिस अफसर व्यापारियों के बीच अपनी बात रख रहे हैं। पिछले दिनों बेल्हा आए आईजी मोहित अग्रवाल ने भी व्यापारियों से अपेक्षा की थी कि वे अपनी दुकानों के बाहर सीसीटीवी कैमरे लगवाएं ताकि हर गतिविधि कैद होती रही। आपराधिक घटनाओं को अंजाम देकर भागने वालों की पहचान हो सके। शासन से वर्ष 2012 में सभी थानों और पुलिस चौकियों के साथ ही संवेदनशील बाजारों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के लिए पांच लाख रुपये मिले थे। नगर कोतवाली व सभी पुलिस चौकी में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के साथ ही श्रीरामतिराहे पर भी तीसरी आंख से पुलिस नजर रखने लगी थी। दो सालों तक सबकुछ ठीक-ठाक चलता रहा। इसके बाद मरम्मत व देखरेख के अभाव में सदर तहसील, नगर कोतवाली, सिविल लाइन पुलिस चौकी, श्रीराम तिराहा, सदर बाजार और भुपियामऊ पुलिस चौकी पर सीसीटीवी कैमरे खराब हो गए। मौजूदा समय में भी इन स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरे काम नहीं कर रहे हैं। आपराधिक घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए फिक्रमंद पुलिस अफसरों को पहले अपने बीमार कैमरों को ठीक कराना होगा। जिससे उन्हें दूसरों की जरूरत न पड़े।
सीसीटीवी में कैद होता है दुकानों का ताला
शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों की बाजारों में बहुत से व्यापारियों व बैंकों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। अधिक जानकारी न होने के कारण दुकानदार कैमरा सीधे अपने शटर के ताले की ओर कर रखे हैं। जिससे दुकान के बाहर लगा कैमरा केवल शटर का ताला ही कैद करता रहता है। ऐसे दुकानदारों को जागरूक करने की भी जरूरत है ताकि आसपास की गतिविधि भी कैद होती रहे।
जो कैमरे खराब हैं। उन्हें बदलने के लिए पुलिस मुख्यालय को पत्र भेजा गया है। जल्द ही खराब पड़े सीसीटीवी कैमरे दुरुस्त हो जाएंगे।
पूर्णेंदू सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी