क्रय केंद्रों पर धान की खरीद नहीं होने से किसान परेशान हैं। इससे धान क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। धान को औन पौन दामों पर बेचने को मजबूर हैं।
लालगंज के खानापट्टी, सांगीपुर, अठेहा, सगरा सुंदरपुर, रानीगंज कैथौला, संग्रामगढ़ आदि जगहों पर शासन ने किसानों के धान खरीदने के लिए क्रय केंद्रों को खोला है। लेकिन धान की खरीद में नियम व शर्तें से किसान हलाकान हो रहे हैं। क्रय केंद्रों को खुले हुए भले ही पखवारे भर का समय बीत गया हो लेकिन अभी तो यहां किसानों को अपनी फसल बेचना टेढ़ी खीर हो गया है। धान क्रय केंद्रों अधिकारियों ने निर्देश जारी किया है कि 67 प्रतिशत से कम रिकवरी के धान की किस्म वाली फसलों की खरीद नहीं की जाएगी।
बस यही फैसला किसानों के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। अफसरों के बनाए गए पैमाने पर सिर्फ मंसूरी धान ही खरा उतर सका है। लेकिन लालगंज के किसान अधिक पैदावार की लालच में धान की अन्य किस्में ही लगाते हैं। उनको यह उम्मीद नहीं थी कि उनकी फसलों को धान क्रय केंद्रों पर नहीं खरीदा जाएगा। पखवारे भर से क्रय केंद्रों को चक्कर लगा कर थक चुके किसान अब मेहनत से तैयार अपनी फसल को सस्ते दामों में बेचने को मजबूर हैं। केंद्रों पर शासन ने धान की खरीद के लिए 1470 रुपये प्रति कुंतल रेट निर्धारित किया है। लेकिन धान खरीदने से इंकार करने के चलते पांच सौ रुपये प्रति कुंतल नुकसान झेलकर धान स्थानीय बाजारों व राइसमिल संचालकों को बेचा जा रहा है। हालात यह है कि धान की फसल तैयार करने में किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है।
वही दूसरी तरफ नोटबंदी के बाद किसानों की धान की फसलों की खरीद नहीं होने से दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। किसान घर में फसल रख नहीं सकता और क्रय केंद्रों पर धान की खरीद हो नहीं पा रही। इसका फायदा उठाते हुए फसल खरीदने वाले तीस दिसंबर के बाद नई नोट मिलने पर भुगतान की बात करते हैं। मजबूरी में किसान अपनी फसलों को सस्ते दामों पर उधार में दे दे रहे हैं।
किसानों ने धान की खरीद नहीं होने की शिकायत की है। क्रय केंद्र पर निर्धारित नियमों के हिसाब से फसल की खरीद होने की बात सामने आई है। किसानों की समस्याओं को देखते हुए नियमों में रियायत के लिए अफसरों को पत्र लिखा जाएगा।
राजेंद्र प्रसाद तिवारी, एसडीएम लालगंज