डायट में आठ साल से संबद्ध बेसिक शिक्षा विभाग के 13 अध्यापकों को लेकर बीएसए और डायट प्राचार्य आमने-सामने हो गए हैं। बीएसए ने दिसंबर 2016 में ही संबद्धता समाप्त करते हुए सभी शिक्षकों को मूल विद्यालय में शिक्षण कार्य करने का आदेश जारी किया था, मगर शिक्षक स्कूल पहुंचने के बजाय डायट में ही जमे रह गए। इससे नाराज बीएसए ने उनके जनवरी माह के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी है। उधर, डायट प्राचार्य शिक्षकों को रिलीव करने के लिए तैयार नहीं हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात 13 शिक्षकों को वर्ष 2009 में डायट से संबद्ध किया गया था। डायट में प्रवक्ताओं की तैनाती नहीं होने से इन्हें कामचलाऊ प्रशिक्षण के लिए रखा गया था। तत्कालीन डीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी ने निर्णय लेते हुए इन अध्यापकों को काम चलाऊ व्यवस्था के तहत प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी सौंपी थी। यह शिक्षक मूलरूप से जिले के विभिन्न ब्लाकों के स्कूलों में तैनात हैं। यह काम तो डायट में करते हैं, मगर इनके वेतन का भुगतान स्कूलों से होता है। सितंबर 2016 में बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशक ने बीएसए को पत्र जारी कर संबद्धता समाप्त कर मूल विद्यालय में तैनाती का आदेश दिया।
26 दिसंबर 2016 को बीएसए ने डायट प्रिंसिपल को पत्र लिखकर अध्यापकों को कार्यमुक्त करने और शिक्षकों को मूल विद्यालय में शिक्षण कार्य करने का पत्र जारी किया। बीएसए के आदेश के बाद भी यह अध्यापक डायट में जमे रहे। इससे नाराज बीएसए ने इनके जनवरी माह के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी। इसके बाद भी यह शिक्षक अभी डायट में ही जमे हैं। इधर, डायट प्राचार्य अध्यापकों के बचाव में उतर आए हैं।ि उन्होंने बीएसए को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि यह शिक्षक संबद्ध नहीं हैं, बल्कि उन्हें कमेटी ने कामचलाऊ व्यवस्था के तहत यहां तैनात किया है। इसलिए निदेशक का आदेश इन अध्यापकों पर लागू नहीं होता है।
लोक सेवा आयोग से डायट प्रवक्ताओं की नियुक्ति नहीं होने से बेसिक शिक्षा विभाग के काम चलाऊ अध्यापकों से काम लिया जा रहा है। अगर शिक्षकों को कार्यमुक्त कर दिया जाए तो डायट में ताला लगाना पड़ेगा। शिक्षकों को हटाने का अधिकार बीएसए को नहीं है।
नरेंद्र शर्मा, प्राचार्य, डायट।
बेसिक शिक्षा निदेशक के आदेश के क्रम में 26 दिसंबर 2016 को डायट में संबद्ध 13 शिक्षकों की संबद्धता समाप्त कर दी गई है। अध्यापकों ने आदेश की अवहेलना करते हुए अभी तक विद्यालयों में कार्यभार नहीं ग्रहण किया है, इसलिए सभी 13 अध्यापकों का जनवरी माह का वेतन रोक दिया गया है। अगर अध्यापक अपने मूल विद्यालय नहीं आते हैं तो सेवा समाप्ति की कार्रवाई होगी।
बीएन सिंह, बीएसए।